पूरे भारत देश में अभी कोरोना वायरस महामारी का प्रकोप चल रहा है और हालात बेकाबू हैं। इसके बावजूद भी कई ऐसे मरीज हैं जो मौत के मुंह में जाकर भी वापस आ रहे हैं। इसी का जीता जागता उदाहरण एक 84 साल का मरीज है जो 5 साल से कैंसर पीड़ित लेकिन जब कोरोना लहर में तबीयत बिगड़ी तो ना तो कोरोना से डरे और ना ही कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से। उन्होंने दोनों ही बीमारियो से जमकर लोहा लिया और अपने हौसले की दम पर जिंदगी को अपने नाम कर लिया। वह घबराए नहीं और दोनों महामारी से लड़कर धीरे-धीरे सामान्य जिंदगी की तरफ लौट रहे हैं।

इसी घातक बीमारी से जंग जीतने वाला शख्स एमपी के रायसेन जिले के रहने वाले 84 साल के गोपीलाल पटेल है। ये बुजुर्ग कैंसर से जूझते हुए भी कोरोना को मात दे चुके हैं। दरअसल, 15 अप्रैल के आसपास कोरोना रायसेन की बरेली के साथ-साथ गांवों में दस्तक दे चुका था। उसके दो दिन बाद गोपीलाल में महामारी के लक्षण दिखाई दिए। डॉक्टरों को दिखाया तो कहने लगे उनको कोरोना है। किसी तरह उन्हें मेडिकल किट की दवाएं खिलाईं। तीन से चार दिन में बुखार तो ठीक हो गया, लेकिन कमजोरी बढ़ती गई। गले में इंफेक्शन और जकड़न के कारण उन्होंने खाना छोड़ दिया। तबीयत इतनी ज्यादा बिगड़ गई कि वह 12 दिन बिना अन्न ग्रहण किए रहे। लेकिन उनका जोश और जज्बा फिर भी देखने लायक था। वह परिजनों से यह कहते थे कि जब कैंसर उनका कुछ नहीं बिगाड़ सका तो ये कोरोना उनका क्या उखाड़ लेगा।

इस बजुर्ग के परिजन पूरी तरह से डरे हुए थे, वह उनका चेहरा देखते और मायूस हो जाते। क्योंकि बीमारी ने बुरी तरह से उन्हें जकड़ रखा था। खाना तो दूर यहां तक की दवाएं तक उनके गले से नहीं उतरती थीं। अब एक ही रास्ता था कि सारी दवाओं को पीस-पीसकर पानी के साथ खिलाना शुरू किया और स्वस्थ होते चले गए। इसके बाद धीरे-धीरे बीमारी कंट्रोल हो गई। अभी दो से तीन महीने में जांच और कीमो के लिए अस्पताल जाना पड़ता है।