असमिया भाषी पांडु महाविद्यालय के उप-प्राचार्य और हिंदी विभाग के अध्यक्ष रफीकुल हक का हिंदी प्रेम हिंदीभाषियों के लिए प्रेणा का उदाहरण है।

असमिया से हिन्दी में  अजान फकीर, पथरुघाट की लड़ाई, प्रेमचंद के गबन समेत कई महत्वपूर्ण पुस्तकों का अनुवाद कर चुके रफीकुल हक में हिन्दी के प्रति जुनून है।


वे अपने खर्च पर पिछले चार बार से विश्व हिंदी सम्मेलन में भाग लेने जाते रहे हैं। इस बार भी वे माॅरीशस में होने वाले 11वें विश्व हिंदी सम्मेलन में प्रतिनिधि के रूप में भाग लेने जा रहे हैं।

इस बार  उनके साथ बी.बरुवा काॅलेज के हिंदी विभाग के अध्यक्ष डॅा.धनेश्वर कलिता और केंद्रीय विद्दालय के अवकाशप्राप्त शिक्षक  रामचंद्र भी जा रहे हैं।इन लोगों का देवनागरी लिपि के प्रति गजब का आग्रह है।

रफीकुल हक इसके पहले न्यूयार्क, जोहांसबर्ग औऱ भोपाल में आयोजित हिंदी सम्मेलनों में भाग ले चुके हैं।