इस बार लोकसभा चुनाव में मिजोरम से एक कैंडिडेट ऐसी भी हैं, जिनका सपना भारत में एक 'नया यरुशलम' बनाना है। 63 साल की लालथलामुआनी को पिछले साल हुए मिजोरम विधानसभा चुनावों में सिर्फ 69 वोट मिले थे। उनका कहना है कि उनको चुनाव लड़ने के लिए 'गॉड के विजन' से प्रेरणा मिली है। बता दें कि वह मिजोरम की एकमात्र लोकसभा सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ रही हैं।

मिजोरम की राजधानी आइजोल के द्वारपुरी इलाके की निवासी लालथलामुआनी कहती हैं कि वह इजरायल के एक ऐसी आदिवासी समुदाय से हैं, जिसके लोग मिजोरम, मेघालय, मणिपुर और चीन में फैले हुए हैं। वह कहती हैं, 'मैं चुनाव में इसलिए हूं कि मुझे गॉड ने विजन दिया है। गॉड ने मुझे जो विजन दिया है, वह बाइबल के चैप्टर 15 वर्स 24 में लिखा भी है। मैं बाइबल में विश्वास करती हूं और यह मेरा दायित्व है कि मुझे गॉड ने भारत और दुनिया के बारे में जो बताया है, उसका प्रचार करूं। लगभग हो चुके इस समुदाय के बारे में लोगों को बताने के लिए चुनाव से बेहतर कोई माध्यम नहीं हो सकता है।' 

आपको यह भी बता दें कि लालथलामुआनी मिजोरम में इकलौती महिला कैंडिडेट हैं। इस बारे में वह कहती हैं, 'महिलाओं ने बाइबल में मुख्य भूमिका निभाई है। ईस्टर, देबरी और जुदिथ जैसी कहानियां मुझे प्रेरणा देती हैं। इसीलिए मैं सांसद का चुनाव लड़ रही हूं। एक महिला का चुनाव लड़ना देश और भविष्य की पीढ़ियों के लिए अच्छा है।' सिर्फ 25,000 रुपये के साथ चुनाव लड़ रहीं लालथलामुआनी जाकर लोगों को अपने बारे में बता रही हैं। उनके बेटे फ्रैंकी साइलो भी उनकी मदद कर रहे हैं। 

पिछले चुनाव में हार चुकीं लालथलामुआनी के दिमाग में अभी भी 'नया यरुशलम' बनाने की योजना है। वह अपने इस खोए समुदाय के लिए काम करना चाहती हैं। उनका वादा है कि अगर चुनाव जीतीं तो अपने समुदाय के लोगों को इजरायल घूमने में मदद करेंगी। मिजोरम और मणिपुर में कई लोगों का दावा है कि वह भी इसी बनेई मेनाशे समुदाय से आते हैं।