इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि लिव-इन रिलेशनशिप से देश का सामाजिक ताना-बाना नष्ट नहीं होना चाहिए। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कहा, "लिव-इन-रिलेशनशिप इस देश के सामाजिक ताने-बाने की कीमत पर नहीं हो सकती।" कोर्ट ने यह बात अपने साथी के साथ रहने वाली एक विवाहित महिला की सुरक्षा याचिका को खारिज करते हुए कही जिसकी कीमत 5000 रुपये है।

कोर्ट ने आगे महिला के अपने साथी के साथ संबंधों को 'अवैध' करार दिया। कोर्ट ने कहा कि "कोई भी कानून का पालन करने वाला नागरिक जो पहले से ही हिंदू विवाह अधिनियम के तहत विवाहित है, अवैध संबंधों के लिए इस न्यायालय की सुरक्षा की मांग नहीं कर सकता है, जो इस देश के सामाजिक ताने-बाने के दायरे में नहीं है,"।

महिला ने कोर्ट में एक सुरक्षा याचिका दायर कर कहा था कि चूंकि वह अपने लिव-इन पार्टनर के साथ रह रही है, इसलिए उसका पति "उनके शांतिपूर्ण जीवन को खतरे में डालने की कोशिश कर रहा है"।