उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में आज मंगलवार को शराब की दुकानें खुल गईं।  शराब की दुकानों के खुलने से लोग इस कदर उत्साहित हो गए कि वह भूल गए कि कोरोना की महामारी चल रही है और इससे सभी को बचाव करना चाहिए।  

कोरोना से बचाव में सबसे कारगर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना तो दूर उल्टा उसकी धज्जियां उड़ाते नजर आए।  कई शराब की दीवानों का तो यहां तक कहना रहा है कि शराव की दुकान खुलने से कोरोना भाग जाएगा और स्थिति सामान्य हो जाएगी। 

बाराबंकी मुख्यालय पर कतारों में एक-दूसरे से सटकर खड़े दिखाई दे रहे लोगों के मन में एक ही धुन है कि जल्दी से जल्दी उनके हाथों में शराब की बोतल आ जाये।  इस धुन के लिए यह लोग भूल गए हैं कि यह दौर महामारी का है और इससे बचाव करना उनकी जिम्मेदारी है।  सरकार ने जहां लोगों से कम से कम 6 फिट की दूरी बनाने के लिए कहा है, वहीं यह शराब के शौकीन लोग आधा फिट की दूरी का भी पालन करने को तैयार नही है। 

इन लोगों का कहना है कि सरकार ने शराब की दुकान खुलवा कर काफी अच्छा काम किया है।  इससे गांजा, भांग की ओर भाग रहा आदमी शराब की तरफ मुड़ जाएगा और स्थितियां जल्दी ही सामान्य हो जाएंगी।  शराब के सेवन से उन्हें रात में अच्छी नींद और दिन में ज्यादा काम करने में बल मिलेगा। 

शराब के शौकीनों का कहना है कि शराब की दुकान खुलवाकर सरकार ने काफी अच्छा काम किया है।  इससे स्थितियां जल्दी सामान्य हो सकेगी।  दुकानों के खुल जाने से ही उन्हें काफी अच्छा महसूस हो रहा है और इसके सेवन से और अच्छा हो जाएगा।

  वहीं कुछ लोगों ने बताया कि कोरोना को भगाने का शराब एक कारगर तरीका है इसीलिए सरकार ने दुकानें खोलने का आदेश पारित किया है।  इसके सेवन से उन्हें रात में अच्छी नींद भी आएगी और दिन में ज्यादा काम करने की ऊर्जा भी मिलेगी। 

कुछ शराब के शौकीनों को इस बात का मलाल है कि सिर्फ अंग्रेजी शराब की दुकानें खुली हैं, जो काफी  महंगी है।  अगर देशी शराब की दुकान भी खुल जाती तो गरीब आदमीं भी राहत महसूस करता।