पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग में पृथक गोरखालैंड राज्य की मांग को लेकर गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (जीजेएम) की ओर से पिछले लगभग तीन माह से जारी आंदोलन एवं विरोध प्रदर्शनों के दौर के बाद जनजीवन धीरे-धीरे पटरी पर लौटने लगा है।

सिलीगुड़ी से दो सरकारी बसें यात्रियों को लेकर बुधवार को दार्जिलिंग के लिए रवाना हुई। दार्जिलिंग में शांति बहाली एवं स्थिति सामान्य करने को लेकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और घाटी में सक्रिय राजनीतिक दलों के बीच मंगलवार हुई द्विपक्षीय बैठक के दूसरे दौर के बाद यह बस सेवा शुरू हुई है। 

उत्तर बंगाल राज्य परिवहन निगम (एनबीएसटीसी) की दो बसें सिलीगुड़ी शहर से कुर्सियांग होते हुए दार्जिलिंग के लिए रवाना हुयी। इन बसों के आज शाम तक वापस आने की संभावना है। 

प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार एनबीएसटीसी की बसें मिरीक और कलिमपोंग में भी चल रही हैं। सूत्रों के अनुसार मिरीक में शैक्षणिक संस्थानों को पुन: खोलने के लिए सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए हैं। मंगलवार दोपहर उत्तरकन्या में 90 मिनट तक चली द्विपक्षीय बैठक के बाद बनर्जी ने कहा कि सरकार दार्जिलिंग में शांति बहाल करने और सार्वजनिक वितरण प्रणाली को जल्द से जल्द दुरुस्त करने की इच्छुक है। 

बनर्जी ने इस मामले से जुड़े सभी पक्षों से सरकार का सहयोग करने की अपील की। इसी बीच, गिरफ्तारी से बचने के लिए अज्ञात स्थान पर छिपे जीजेएम के अध्यक्ष बिमल गुरुंग ने एक बयान जारी कर कहा कि सर्वदलीय बैठक में गोरखालैंड की मांग को लेकर कोई चर्चा नहीं की गयी। 

गुरुंग ने आंदोलन के दौरान पुलिस की ओर से की गयी कार्रवाई के विरोध में जनता कर्फ्यू की चेतावनी दी है। गुरुंग ने अपने बयान में त्रिपक्षीय वार्ता की मांग की है।