बिहार में गया व्यवहार न्यायालय ने एक युवक का अपहरण कर हत्या किये जाने के मामले में आज एक पूर्व पुलिस उपाधीक्षक समेत चार पुलिसकर्मियों को उम्रकैद की सजा सुनाई। त्वरित अदालत प्रथम के न्यायाधीश दिग्विजय सिंह की अदालत ने यहां मामले में दोनों पक्षों की दलीले सुनने के बाद सेवानिवृत पुलिस उपाधीक्षक और कोतवाली थाना के तत्कालीन प्रभारी मुनरिका प्रसाद यादव , शंभू सिंह, समीर सिंह और नंदू पासवान के अलावा अनुग्रह नारायण मगध मेडिकल कॉलेज के कर्मचारी विजय प्रकाश को भारतीय दंड विधान की (भादवि) विभिन्न धाराओं में दोषी करार देने के बाद यह सजा सुनाई है। 

अदालत ने सभी पर 55-55 हजार रुपये का जुर्माना भी किया। अदालत ने अर्थदंड की राशि पीड़ित परिवार को देने का आदेश दिया है। आरोप के अनुसार, 26 अगस्त 1996 को गया शहर के कोतवाली थाना क्षेत्र स्थित मिरचाईया गली मोहल्ला के रहने वाले मुन्ना सिंह को पुलिस किसी बहाने से अपने साथ ले गयी। अगले दिन तक जब मुन्ना अपने घर नहीं लौटा तो परिजनों ने उसकी खोजबीन शुरू की, लेकिन उसका पता नहीं चल सका। 

अगले दिन मृतक के भाई को किसी तरह जानकारी मिली कि पुलिस के द्वारा दिये शारीरिक यातना से उसकी भाई की मौत हो गयी और आनन-फानन में शव का पोस्टमार्टम करा कर उसे जलाने के लिए श्मशान घाट ले गयी है। मृतक के परिजन जब गया के विष्णुपद इलाके में स्थित श्मशान घाट पहुंचे तो एक ठेले पर रखे अज्ञात शव के चेहरे से कपड़ा हटाया तो उसकी पहचान मुन्ना के रूप में की गयी। इस सिलसिले में स्थानीय अदालत में उसी दिन एक परिवाद दाखिल करने की कोशिश की गयी लेकिन देर शाम होने के कारण ऐसा नहीं हो सका। बाद में इस सिलसिले में एक प्राथमिकी दर्ज करायी गयी थी। 

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