दिमापुर। नागालैण्ड के मुख्यमंत्री एस.लिजित्सु ने राज्यपाल पी.बी.आचार्य के उस निर्देश को मानने से इनकार कर दिया है जिसमें 15 जुलाई तक विधानसभा में बहुमत साबित करने को कहा गया था। गौरतलब है कि पूर्व मुख्यमंत्री टीआर जेलियांग ने नई सरकार बनाने का दावा पेश किया था। जेलियांग ने 34 एनपीएफ और 7 निर्दलीय विधायकों के समर्थन का दावा किया था। राज्यपाल ने मंगलवार को लिजित्सु को 15 जुलाई या उससे पहले विधानसभा में शक्ति परीक्षण के लिए कहा था। हालांकि मुख्यमंत्री ने कहा कि विधानसभा को 15 जुलाई या उससे पहलने बुलाने का सवाल ही नहीं उठता क्योंकि उनकी अध्यक्षता वाली मंत्रिपरिषद ने राज्यपाल को ऐसा करने के लिए सलाह नहीं दी है। 

विधानसभा अध्यक्ष को लिखे पत्र में पूर्व के लीगल उदाहरणों का हवाला देते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट स्पष्ट रूप से कह चुका है कि राज्यपाल के पास लेजिस्लेटिव असेंबली को बुलाने, भंग करने या सत्रावसान का कोई अधिकार नहीं है। लिजित्सु ने हाल ही में नबाम रेबिया और दमांग फेलिक्स वर्सेज डिप्टी स्पीकर अरुणाचल प्रदेश लेजिस्लेटिव असेंबी व अन्य पर सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश का उदाहरण किया। राज्यपाल के निर्देश को स्वीकार करते हुए पत्र में कहा गया है कि वह उनकी अध्यक्षता वाली मंत्रिपरिषद की सलाह या उपादन पर ऐसा कर सकते हैं। मेरी अध्यक्षता वाली मंत्रिपरिषद ने राज्यपाल को राज्य विधानसभा को बुलाने की सलाह नहीं दी है। यह कानून की अपरिहार्य पोजिशन होगी जब तक मंत्रिपरिषद राज्यपाल को विधानसभा बुलाने की सलाह नहीं दे देती। ऐसे में 15 जुलाई या उससे पहले विधानसभा बुलाने का सवाल ही नहीं उठता। 

लिजित्सु ने कहा राज्यपाल ने टीआर जेलियांग के नेतृत्व वाले विधायकों के समूह की ओर से सौंपे गए अनुरोध पर निर्देश जारी किया है। मुख्यमंत्री का रेस्पांस स्पीकर इम्तिवापांग के रूट के जरिए आया है। इस बीच 10 नॉर्दन अंगामी-1 विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव के लिए 12 जुलाई नामांकन पत्र दाखिल करने की आखिरी तारीख थी। इस सीट पर 29 जुलाई को उप चुनाव है। लिजित्सु के खिलाफ किसी भी दल ने अपना उम्मीदवार नहीं उतारा है। केखराई योहम ने कोहिमा में डिप्टी कमिश्नर के दफ्तर में बुधवार को बतौर निर्दलीय अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। उन्होंने कहा, युवाओं के बीच स्वच्छ चुनाव की जागरुकता फैलाने के लिए मैंने उप चुनाव लडऩे का फैसला किया है। सीटिंग एनपीएफ विधायक के.लिजित्सु के इस्तीफे के बाद उप चुनाव जरूरी हो गया था। के.लिजित्सु ने अपने पिता का रास्ता साफ करने के लिए विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। मुख्यमंत्री एस.लिजित्सु अभी विधानसभा के सदस्य नहीं है। फरवरी में जेलियांग के इस्तीफे के बाद वह मुख्यमंत्री बने थे।