नेता विरोधी दल देवब्रत सइकिया ने अगप पर अपने राजनीतिक लाभ के लिए अवैध घुसपैठ मुद्दे पर राज्य के लोगों को भ्रम में डालने का आरोप लगाया है। यहां जारी बयान में साइकिया ने कहा कि असम समझौते पर हस्ताक्षर और राज्य में अगप के शासन में अाने के बाद 25 हजार कर्मचारियों को लगा कर राज्य में चुनाव अायोग की निगरानी में गहन मतदाता पुनरीक्षण अभियान चलाया गया था। 

घर-घर जाकर हर व्यस्क की दो लिस्ट बनाइ गईं थीं। शुरूआती स्तर पर लगभग चार लाख नाम काट दिए गए थे। सइकिया ने बताया कि राज्य के निर्वाचन अधिकारियों ने वर्ष 1990 में फिर चुनाव आयोग के निर्देशन में विशेष पुनरीक्षण अभियान चलाया था। तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रफुल्ल कुमार महंत ने 5 अक्टूबर1990 को यहां के एक अंग्रेजी अखबार को बयान दिया था कि सुधारी गई मतदाता सुची से वे संतुष्ट है और वह शुद्ध है। नेता विरोधी दल ने कहा कि तब शुरूआत में विदेशी पहचान न्यायाधिकरणों को तीन लाख सत्तर हजार डी-वोटरों के मामले भेजे गए थे।

बाद में यह संख्या घटकर एक लाख 45 हजार 227 रह गई। सईकिया ने कहा कहा कि हैरतजनक ढंग से वर्ष 1990 से 1994 के बीच राज्य में मतदाताओं की संख्या में तीन लाख 67 हजार 628 की बढ़ोतरी हो गई थी, लेकिन चुनाव अायोग ने इसे सामान्य सीमा के भीतर माना था। उन्होंने बताया कि कुल 6590 डी-वोटरों सहित 61,774 लोगों को विभिन्न विदेशी पहचान न्यायाधिकरणों ने वर्ष 1985 से 2012 के दौरान विदेशी घोषित किया था। यह आंकड़ा वर्ष 2012 में राज्य सरकार के गृह एंव राजनीतिक विभाग के श्वेत पत्र में दिया गया था । इनमें से अाधे वे थे, जो वर्ष 1968 से 1971 के बीच राज्य में आए थे। असम समझौते के अनुसार ये सब एक निर्धारित अवधि के बाद नागरिक के रुप में पंजीकृत होने के हकदार हैं।