इलाहाबाद हार्इकोर्ट के 150वें वर्षगांठ समारोह के समापन अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि कानून सबके लिए बराबर होना चाहिए। पीएम मोदी ने कहा कि गांधीजी ने कहा था कि निर्णय के दौरान कोर्इ दुविधा हो तो हमें देश के आखिरी छोर पर बैठे व्यक्ति के बारे में सोचकर फैसला करना चाहिए। इसके साथ ही पीएम मोदी ने न्याय व्यवस्था में तकनीक के उपयोग पर जोर देते हुए कहा कि मोबाइल फोन पर, एसएमएस पर डेट लेने-देने की परंपरा क्यों न शुरू करें।

पीएम मोदी ने कहा कि मैं कितने नए कानून बनाऊंगा मुझे मालूम नहीं है, लेकिन कहा था कि पीएम बन गया तो हर दिन एक कानून खत्म करूंगा। हमें खुशी है कि 5 साल पूरे नहीं हुए हैं और अभी तक सरकार ने 1200 कानून खत्म कर दिए हैं। 

इस मौके पर उन्होंने कहा कि चीज जस्टिस साहब अपने दिल की बात बता रहे थे और मैं सुन रहा था। मैं उनके हर शब्द में पीड़ा अनुभव कर रहा था। 

उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि न्याय प्रदान करना सबसे बड़ा धर्म माना गया है। उन्होंने कानून को शासकों के शासक की संज्ञा देते हुए कहा कि लोकतंत्र की नींव मजबूत न्यायपालिका पर निर्भर है। प्राचीन काल से न्याय और विधि एक दूसरे के पूरक रहे हैं। 

उधर, समारोह के दौरान चीफ जस्टिस खेहर ने जजों की कमी पर चिंता जताते हुए कहा कि हार्इकोर्ट और निचली अदालतों के जजों पर भारी बोझ है। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी मन की बात करते हैं आैर देश उनकी बातों को सुनता है। अब मुझे मन की बात करने दें।

इससे पहले, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी रविवार को इलाहाबाद उच्च न्यायालय के स्थापना वर्ष के समापन समारोह में भाग लेने के लिए इलाहाबाद के बमरौली हवाई अड्डे पर पहुंचे। बमरौली हवाई अड्डे पर मोदी का स्वागत उत्तर प्रदेश के राज्यपाल रामनाईक, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उप मुख्यममंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने किया।

गौरतलब है कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय के स्थापना वर्ष के 150 साल पूरे होने पर एक साल से विभिन्न कार्यक्रम चल रहे हैं। इसके उद्घाटन समारोह में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी शामिल हुए थे जबकि समापन समारोह में भाग लेने के लिए मोदी इलाहाबाद पहुंचे।