कारोबारियों और उद्यमियों को वस्तु एवं सेवा कर(जीएसटी) में बड़ी राहत देते हुए जीएसटी परिषद ने शुक्रवार को कंपोजिशन योजना सीमा एक करोड़ से बढ़ाकर डेढ़ करोड़ करने और तय करने लिए सिर्फ कर योग्य उत्पादो के कारोबार की गणना करने का निर्णय किया है। इससे कारोबारियों को बड़ी राहत मिलेगी। 

जीएसटी परिषद के अध्यक्ष एवं केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई परिषद की 23वीं बैठक में ये निर्णय लिए गए। चालू वित्त वर्ष में कारोबारियों को सिर्फ जीएसटीआर-1 के रूप में अपना रिटर्न दाखिल करना होगा। 

साथ ही सभी कारोबारियों को जीएसटीआर-3बी रिटर्न दाखिल करने की सुविधा अगले साल मार्च तक मिलती रहेगी। फिलहाल यह सुविधा सिर्फ दिसंबर तक ही थी।


केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली की अध्यक्षता में जीएसटी काउंसिल की शुक्रवार को यहां हुई 23वीं बैठक में ये फैसले लिए गए। 

बैठक के बाद वित्त सचिव हसमुख अढिया ने कहा कि जो व्यापारी निल कारोबार का रिटर्न दाखिल करते हैं, उनके लिए रिटर्न के फॉर्म को और आसान बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि करीब 30 से 40 फीसद व्यापारी निल रिटर्न दाखिल करते हैं।

 रिटर्न फाइलिंग के नियमों में ढील देने संबंधी जीएसटी काउंसिल के फैसले की जानकारी देते हुए अढिया ने कहा कि जीएसटीआर-3बी भरने की सुविधा मार्च, 2018 तक जारी रहेगी। व्यापारी किसी भी माह का जीएसटीआर-3बी अगले माह की 20 तारीख तक भर सकेंगे।


साथ ही जिन व्यापारियों का टर्नओवर डेढ़ करोड़ रुपये सालाना से कम है, वे तीन माह में सिर्फ एक बार जीएसटीआर-1 ही जमा कर सकेंगे। उन्हें जीएसटीआर-2 और जीएसटीआर-3 भरने की जरूरत नहीं होगी। ऐसे व्यापारी जुलाई और सितंबर तक की तिमाही के लिए जीएसटीआर-1 को 31 दिसंबर तक, अक्टूबर-दिसंबर तिमाही के लिए 15 फरवरी, 2018 तक और जनवरी-मार्च के लिए 30 अप्रैल, 2018 तक जमा कर सकेंगे। 

वहीं डेढ़ करोड़ रुपये से ऊपर टर्नओवर वाले व्यामपारियों को हर माह जीएसटीआर-1 फाइल करना होगा। उन्हें भी यह सुविधा मार्च 2018 तक मिलेगी।

जुलाई से लेकर मार्च, 2018 के लिए जीएसटीआर-2 और जीएसटी-3 कब तक भरे जाएंगे, इसकी समयावधि जीएसटी काउंसिल की अधिकारियों की समिति तय करेगी। हालांकि इस अवधि में व्यापारी जीएसटीआर-2 और जीएसटीआर-3 भरे बगैर ही जीएसटीआर-1 भरते रहेंगे।