असम और अरूणाचल प्रदेश से शराब की खेप को शराब तस्कर कटिहार सहित सीमांचल के जिलों में पहुंचा रहे हैं। इस बात का खुलासा पिछले एक माह में ट्रेन शराब की खेप ला रहे तस्करों की गिरफ्तारी से हुआ है। हाल के दिनों तक शराब तस्करी का धंधा पश्चिम बंगाल के कुमेदपुर से किया जाता है।


शराब तस्करों की पसंदीदा जगह है असम व अरूणाचल

बिहार-बंगाल सीमा पर चेक पोस्ट और वाहन चेकिंग अभियान में कई तस्करों के शराब के साथ पकड़े जाने के बाद तस्कर गिरोह में अपना ट्रेंड बदल लिया है। असम और अरूणाचल प्रदेश में विदेशी शराब के प्लास्टिक बोतल में पैक किए जाने का प्रचलन है। वहां निर्मित विदेशी शराब की कीमत बिहार के पड़ोसी राज्यों में बनाई जाने वाली शराब से काफी कम होती है। ट्रेन से प्लास्टिक बोतल में पैक शराब लाए जाने के दौरान उसके टूटने का खतरा भी तस्कर गिरोह को नहीं रहता है। इस कारण शराब तस्करों के लिए असम व अरूणाचल पसंदीदा जगह बनता जा रहा है।


पूर्वोत्तर में फैला है शराब तस्करी का बड़ा नेटवर्क

विभागीय जानकारी के मुताबिक पिछले एक माह में ऐसे तीन मामले सामने आए हैं। पूछताछ में शराब तस्करों ने पूर्वोत्तर से शराब की तस्करी में बड़े नेटवर्क के शामिल होने का भी खुलासा किया है। नार्थ ईस्ट से शराब तस्करी का पूरा खेल कोड वर्ड के सहारे खेले जाने के कारण गिरोह के मास्टर माइंड के नाम, पता की भनक शराब की खेप लाने वाले गिरोह के एजेंट को भी नहीं हो पाती है। शराब की खेप पूर्वोत्तर से गंतव्य तक पहुंचाने के लिए गिरोह के एजेंट को मोटा कमीशन मिलता है। पूर्वोत्तर की ओर से आने वाली ट्रेनों की एसी बोगी से भी शराब की खेप पहुंच रही है। सस्ती दर पर शराब खरीद सीमांचल के जिलों में ऊंची कीमत पर इसकी डिलीवरी तस्कर गिरोह द्वारा डिमांड के आधार पर किया जाता है

रेल पुलिस चला रही है विशेष अभियान
उत्पाद अधीक्षक अरूण कुमार मिश्रा ने कहा कि विदेशी शराब की तस्करी असम व अरूणाचल प्रदेश से ट्रेन से की जा रही है। वहां प्लास्टिक बोतल में शराब पैकिंग के प्रचलन का लाभ तस्कर गिरोह उठा रहा है। एक माह के पूर्वोत्तर से शराब लाए जाने के तीन मामले सामने आए हैं। भारी मात्रा में शराब की बरामदगी के साथ तस्करों की गिरफ्तारी भी की गई है। ट्रेन से शराब तस्करी को देखते हुए रेल पुलिस के सहयोग से विशेष अभियान भी चलाया जा रहा है।