लगभग 94 साल पुराने लक्ष्मी विलास बैंक के मैनेजमेंट में बदलाव की तैयारी चल रही है जिसको लेकर आरबीआई जल्द फैसला ले सकती है। पिछले सप्ताह बैंक के शेयरधारकों ने बोर्ड के सात सदस्यों को बर्खास्त कर दिया था। इसी को देखते हुए रिजर्व बैंक के निदेशकों की समिति (सीओडी) ने प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यपालक अधिकारी पद के लिये तीन उम्मीदवारों के नाम को शॉर्टलिस्ट किया है। इन तीनों नाम को एक सप्ताह के भीतर रिजर्व बैंक के पास भेज दिया जायेगा। आपको यहां बता दें कि सीओडी की समिति में स्वतंत्र निदेशक मीता मखन, शक्ति सिन्हा और सतीश कुमार कालरा हैं।

समिति के सदस्य शक्ति सिन्हा ने कहा, ‘‘बैंक बिना प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) के काम नहीं कर सकता है। बैंक ने पद के लिए साक्षात्कार लिये और तीन उम्मीदवारों का चयन किया है। हम एक सप्ताह के भीतर अपनी सिफारिशें रिजर्व बैंक को भेजेंगे।’’ उन्होंने कहा कि तीनों उम्मीदवार निजी क्षेत्र से हैं। सिन्हा ने कहा कि सीओडी बैंक को एक प्रशासक के रूप में चला रही है और काकमकाज में पूरी पारदर्शिता है।
उन्होंने कहा कि स्पष्ट तौर पर उन निदेशकों पर भरोसा नहीं रह गया था और उन्हें हटाने के लिए मतदान किया गया। यह बैंक पिछले कुछ साल से पूंजी जुटाने का प्रयास कर रहा है, लेकिन सफल नहीं हुआ। गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी इंडिया बुल्स हाउसिंग फाइनेंस कंपनी में विलय के प्रस्ताव को आरबीआई ने 2019 में खारिज कर दिया था।
बैंक की समस्या उस समय शुरू हुई जब उसने एसएमई (लघु एवं मझोले उद्यम) के बजाए बड़ी कंपनियों पर ध्यान देना शुरू किया। बैंक ने फार्मा कंपनी रैनबैक्सी के पूर्व प्रवर्तक मलविन्दर सिंह और शिविन्दर सिंह की निवेश इकाई को 720 करोड़ रुपये का कर्ज दिया. यह कर्ज 2016 के अंत और 2017 की शुरुआत में 794 करोड़ रुपये की मियादी जमा पर दिया गया। यहीं से बैंक की समस्या शुरू हुई। इसके बाद बैंक का घाटा बढ़ने लगा। वहीं, आरबीआई ने सितंबर 2019 में एनपीए बढ़ने के साथ बैंक को तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई के अंतर्गत रखा। वित्त वर्ष 2019-20 में बैंक को 836.04 करोड़ रुपये का घाटा हुआ जो 2018-19 में 894.09 करोड़ रुपये था।