भारत और चीन के बीच 31 जुलाई को सैन्य बातचीत के बाद दोनों देशों ने शांति की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सहमति के मुताबिक, दोनों देशों ने गोगरा इलाके में डिसइंगेजमेंट को अंजाम दिया है। 

दोनों ही देशों ने अग्रिम इलाकों से अपने सैनिकों को वापस बुला लिया है। इसके साथ ही बनाए गए अस्थायी ढांचे भी नष्ट कर दिए गए हैं। यहां तनातनी से पहले वाले हालात को बहाल किया गया है। इससे पहले फरवरी में पैंगोंग झील के उत्तरी और दक्षिणी किनारों से चीन पीछे हटा था। भारत और चीन के सैनिक पिछले साल अप्रैल से ही पूर्वी लद्दाख के कई इलाकों में आमने-सामने थे और जून में हिंसक झड़प भी हुई थी।

भारतीय सेना की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि समझौते के तहत LAC के इस इलाके की सख्ती से निगरानी की जाएगी और दोनों पक्ष इसका सम्मान करेंगे। यथास्थिति को एकतरफा नहीं बदला जाएगा। 

सेना ने कहा कि इसके साथ ही एक और संवेदनशील इलाके में टकराव खत्म कर दिया गया है। दोनों पक्षों ने बातचीत को आगे बढ़ाने और वेस्टर्न सेक्टर में एलएसी के बाकी मुद्दों को सुलझाने की प्रतिबद्धता जताई है। बयान में कहा गया है कि भारतीय सेना और आईटीबीपी देश की संप्रभुता और एलएसी पर शांति बाली के लिए प्रतिबद्ध है।

दोनों देशों के बीच 12वें दौर की बातचीत साढ़े तीन महीने से भी ज्यादा समय के अंतराल पर हुई है। भारत और चीन के विदेश मंत्रियों की मुलाकात के बाद फिर से बातचीत और शांति से सभी मुद्दों को सुलझाने का ऐलान किया गया था। भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर और उनके चीनी समकक्ष ने कहा था कि पूर्वी लद्दाख में गतिरोध जारी रहना, दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर रहा है। 

दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के बीच 14 जुलाई को ताजिकिस्तान की राजधानी दुशांबे में शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गेनाइजेशन (एससीओ) सम्मेलन से इतर करीब एक घंटे लंबी बातचीत हुई थी।