लॉकडाउन के बीच ही केंद्रीय श्रम मंत्रालय ने देशभर में रीजनल प्रविडेंट फंड ऑफिस के साथ ही राज्य कर्मचारी बीमा निगम (ESIC) से संगठित क्षेत्र में नौकरियों के नुकसान और सैलरी मे कटौती की रिपोर्ट बना रहे है। बता दें कि यह रिपोर्ट तैयार कर प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को दी जाएगी। प्रधानमंत्री ने इंडस्ट्री से कहा  कि संकट के इस दौर में कर्मचारियों की छंटनी न की जाए। EPFO के पास पेंशनर्स सहित लगभग छह करोड़ सब्सक्राइबर्स हैं। इसी के साथ ESIC के सब्सक्राइबर्स की संख्या तीन करोड़ से अधिक है।


जैसे कि हम जनाते कि अधिकतर कंपनियों में महीने के अंतिम दिन या अगले महीने की 7 तारीख को वेतन दिया जाता है। अगर वेतन देने में देरी होती है तो उसकी रिपोर्ट सरकार को दी जाए। इस मामले की जानकारी सरकारी अधिकारी ने ईटी को बताया कि EPFO के ऑफिस से सब्सक्राइबर्स से टेलिफोन पर बात कर सकते हैं। लेबर मिनिस्ट्री ने सेंट्रल चीफ लेबर कमिश्नर के तहत कर्मचारियों की नौकरी के नुकसान या सैलरी में कटौती से संबंधित शिकायतों के समाधान के लिए देश में 20 कॉल सेंटर बनाए हैं।


इन कॉल सेंटर पर मिली जानकारी को रिपोर्ट में शामिल किया जाएगा। इसी के साथ एक अन्य अधिकारी ने बताया कि इस डेटा से यह पता चल सकेगा कि कौन से सेक्टर्स और कर्मचारियों पर लॉकडाउन के बाद कारोबार बंद होने का सबसे अधिक असर पड़ा है। जानकारी के लिए बता दें कि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने जारी एक नोट में बताया कि लॉकडाउन के कारण लगभग 37.3 करोड़ वर्कर्स को प्रतिदिन करीब 10,000 करोड़ रुपये की आमदनी का नुकसान हो रहा है।

लॉकडाउन की पूरी अवधि के लिए यह नुकसान 4 लाख करोड़ रुपये से अधिक का होने की संभवाना है। सूत्रों से मिली जानकारी से ज्ञात हुआ कि ईटी ने बताया कि इस डेटा से सरकार को महामारी के संकट के दौर में वर्कर्स की सोशल सिक्योरिटी के लिए योजना बनाने में भी मदद मिलेगी।