दिमाग में कीड़े कहीं से घूसते नहीं लेकिन ये हमारे पेट से होते हुए दिमाग तक पहुंचते हैं। मतलब खाने से कीड़े धीरे धीरे  चलते चलते दिमाग तक पहुंचते हैं और दिमाग खाते हैं। जिससे इंसान या तो पागल हो जाता है या फिर कई तरह की तकलीफे झेलता है। माइग्रेन तो इसके सामने एक छोटी सी तरलीफ है। बता दें कि पहले जब कीड़ा दिमाग में जाता है तो पहली स्टेज में असहनीय दर्द का सामना करना पड़ता है। इससे होने वाला सिरदर्द इतना तेज होता है कि दवाई लेने पर भी नहीं जाता है।

 

उसके बाद मिर्गी या ब्रेन स्टोक होने की संभावना होती है।क्योंकि यह कीड़े दिमाग में जाकर चिपक जाते हैं। इसकी आखिरी स्टेज पर व्यक्ति मौत के दरवाजे तक पहुंच जाता है। इस स्टेज में दिमाग के अंदर खून की गांठें बन जाती है और मरीज अचानक बेहोश हो जाता है। सर्जरी से इन गांठों को निकाला तो जा सकता है लेकिन ज्यादा देर होने पर रोगी की जान भी जा सकती है।

 

इन सब्जियों को काटने से पहले गर्म पानी में पोटैशियम परमैंगनेट मिलाकर भिगो दें फिर दोबारा गर्म पानी से अच्छे धोएं। शोधकर्ताओं के मुताबिक, इस उपाय का असर कुछ प्रतिशत तक ही होता है। कई परिस्थितियों में बड़े कीड़े इस पानी में बहकर निकल भी जाते हैं लेकिन छोटे जीवाणु और कीड़ों के अंडे सब्जी में ही चिपके रह जाते हैं। ऐसे में बेहतर होगा कि आप सब्जियों का सेवन न करें। बरसाती मौसम में बिलकुल भी सेवन ना करें तो अच्छा है।