भारत में बहुत से दर्शनीय स्थल हैं जिनकी यात्रा के दौरान एक अलग ही अनुभूति  होती है। ऐसी ही एक सुंदर और अद्भुत झील बनी है हिमालय के पहाड़ों में जिसका आकार त्रिभुज के समान है। ये उत्तराखंड के हिमालय के पर्वतीय क्षेत्रों में पर बनी है सतोपंथ झील है। इस झील तक पहुंचने के लिए बहुत से दुर्गम रास्तों की ट्रैकिंग करना पड़ती है, लेकिन रास्तों के मनोरम दृश्य के साथ ही झील तक पहुंचने के बाद अद्भुत दृश्यों को देखकर आप रास्ते की थकान और कठिनाइयों को भूल जाएंगे। स्थानीय लोगों के अनुसार इस झील का बहुत अधिक धार्मिक महत्व है और ज्यादातर सैलानी इसके प्रति गहरी आस्था के कारण ही यहां आते हैं। 

सतोपंथ झील के आकार के बारे में भी लोगों में मान्यता प्रचलित है। क्योंकि आमतौर पर झील का आकार गोल या चौकोर होता है, लेकिन यह झील तिकोने आकार की है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस स्थान पर त्रिलोक के स्वामी अर्थात ब्रह्मा, विष्णु और महेश ने इस झील के तीनों कोनों पर खड़े होकर स्नान किया था। इसलिए सतोपंथ झील का आकार तिकोना है। इस झील के प्रति बहुत सी धार्मिक मान्यताएं है, जिसमें से जो सबसे ज्यादा प्रचलित है वो है कि यहां से महाभारत काल के दौरान पांडव भाई इस रास्ते से स्वर्ग की ओर गए थे, इसलिए इस झील का नाम सतोपंथ पड़ा और इसे धरती पर स्वर्ग जाने का रास्ता भी कहा जाता है।

 सतोपंथ झील केवल एक धार्मिक स्थल ही नहीं है बल्कि यहां पर बहुत से सैलानी ट्रैकिंग के उद्देश्य से भी आते हैं। क्योंकि यहां का ट्रैकिंग क्षेत्र अत्यंत कठिन है और यहां पर बहुत से बीहड़ रास्तों और पथरीले ढलानों से होकर गुजरना पड़ता है। इस स्थल की सुंदरता के कारण केवल भारत ही नहीं बल्कि विदेश से भी पर्वतारोही आते हैं ट्रैकिंग के लिए। यह झील बद्रीनाथ से 22 किमी दूर है और जोशीमठ से इसकी दूरी 70 किमी है। यहां की ट्रैकिंग के लिए इनर लाइन परमिट की जरूरत पड़ेगी क्योंकि यह स्थान भारत और तिब्बत की सीमा के पास पड़ता है।