केन्द्र सरकार अप्रेल 2020 से एनपीआर यानि नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर तैयार करने का फैसला कर चुकी है। नागरिकता संशोधन विधेयक और एनआरसी का विरोध करने वालों का कहना है कि एनपीआर ही एनआरसी की पहली सीढ़ी है और एनपीआर से ही एनआरसी तैयार होगी, जबकि केन्द्र सरकार एनपीआर और एनआरसी में कोई संबंध होने से इनकार कर रही है, लेकिन सच्चाई यह है कि सुप्रीम कोर्ट 2005 में ही इस प्रश्न को तय कर चुका है कि किसी व्यक्ति की जन्म तिथि और स्थान के साथ ही उसके माता-पिता की जन्म तिथि और जन्म स्थान की जानकारी उस व्यक्ति की नागरिकता तय करने के लिए ही है।

सोनवाल ने दायर की थी याचिका

यह याचिका असम के वर्तमान मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल की थी। सोनोवाल ने आसाम में अवैध प्रवासियों की नागरिकता मामलों की सुनवाई के लिए बनाए गए आईएमडीटी एक्ट-1983 को चुनौती दी थी। केवल असम में ही लागू इस कानून को सुप्रीम कोर्ट ने असंवैधानिक घोषित कर रद्द कर दिया था और नागरिकता मामलों की सुनवाई विदेशी नागरिक कानून के तहत विदेशी ट्रिब्यूनल में करने के निर्देश दिए थे। 12 जुलाई,2005 के फैसले को तीन जजों की बैंच के लिए जस्टिस जी.पी.माथुर ने लिखा था। कोर्ट इस फैसले में कहा है कि किसी व्यक्ति की नागरिकता तय करने के लिए उस व्यक्ति को अपनी जन्म तिथि, जन्म स्थान, अपने माता-पिता की जन्म तिथि और जन्म स्थान और नागरिकता के सबूत देने होंगे। यह जानकारी देना इसलिए भी जरुरी है कि क्यों कि यह जानकारी केवल संबंधित व्यक्ति के पास ही हो सकती है ना कि सरकार के पास। यदि किसी व्यक्ति की नागरिकता को लेकर संदेह है तो अपनी जानकारी को सही साबित करने की जिम्मेदारी भी उसी व्यक्ति ही होगी।

एनपीआर एनआरसी की पहली सीढ़ी

एनपीआर में आमतौर पर रिहाईश दर्ज होगी और एनआरसी नागरिकता तय करेगा। एनपीआर में विदेशी नागरिकों का ब्यौरा भी दर्ज होगा। केन्द्र सरकार एनपीआर और एनआरसी में आपसी संबंध होने से इनकार कर रही है लेकिन यदि 2020 की एनपीआर में ऊपर बताई गई जानकारियां ली गईं तो इसमें कोई दो राय नहीं है कि एनपीआर एनआरसी की पहली सीढ़ी है। 

नागरिकता नियमों के तहत पॉपुलेशन रजिस्टर का अर्थ भी बताया गया है कि यह किसी गांव, ग्रामीण इलाके, किसी कस्बे और शहर के वार्ड या वार्ड में चिन्हित किए गए एरिया में आमतौर पर रहने वाले लोगों का रजिस्टर होगा। नागरिकता नियम 2003 का नियम 4(3) के अनुसार भारतीय नागरिकों का रजिस्टर पॉपुलेशन रजिस्टर में दर्ज की गई हर व्यक्ति और परिवार की जानकारी की रजिस्ट्रार जनरल ऑफ सिटिजन रजिस्टर की ओर से नियुक्त लोकल रजिस्ट्रार तहकीकात और सत्यापित करेगा। इस नियम से स्पष्ट है कि एनपीआर की जानकारियों के आधार पर ही एनआरसी तैयार होगी।

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