देश के उत्तर-पूर्वी राज्यों संबंध रखने वाले किरन रिजिजू बीजेपी के कद्दावर नेता माने जाते हैं। किरन रिजिजू टीम मोदी में दूसरी पारी में मंत्रिमंडल में नई जिम्मेदारी दी गई है। मूलरूप से अरुणाचल प्रदेश से आने वाले रिजिजू को उनके शानदार राजनीतिक रिकॉर्ड की वजह से एक बार फिर उन्हें मोदी मंत्रीमंडल में शामिल होने का मौका मिला है। किरन रिजिजू मौजूदा सरकार में गृहराज्य मंत्री के पद पर थे। साल 2019 के लोकसभा चुनाव में किरन रिजिजू को बीजेपी ने अरुणाचल पश्चिम की सीट से मैदान में उतारा था। बता दें कि किरण रिजिजू को यूथ और खेल (MOS) विभाग सौंपा गया है।

किरन रिजिजू को साल 2004 में अरुणाचल पश्चिम से पहली दफे लोकसभा का टिकट दिया गया था और वो चुनाव जीत कर सांसद बने थे। संसद में वो कई समितियों के सदस्य भी रहे और अपने कामकाज की वजह से वो जल्द ही बड़े नेताओं की निगाह में भी आ गए। साल 2009 में उन्हें दोबारा टिकट दिया गया लेकिन वो चुनाव हार गए। इसके बाद साल 2014 के लोकसभा चुनाव में विजयी हुए।

अरुणाचल प्रदेश में किरन रिजिजू ने बीजेपी के प्रचार-प्रसार का बहुत काम किया। वो खुद भी एक राजनैतिक परिवार से आते हैं। अरुणालय की गालो आदिवासी जनजाति से संबंध रखने वाले रिजिजू के पिता रिन्चिन खारू भी अपने इलाके के लोकप्रिय नेता रहे हैं और अरुणाचल प्रदेश की पहली विधानसभा के अस्थायी अध्यक्ष भी रहे। उत्तर-पूर्वी राज्यों में आज किरन रिजिजू पार्टी की पहचान हैं तो दिल्ली में वो अरुणाचल की आवाज हैं। उन्होंने नॉर्थ ईस्ट के लोगों से जुड़ी समस्याओं पर सुझाव देने के लिए बेजबरुआ कमेटी का गठन किया। किरन रिजिजू ने देश के दूसरे हिस्सों की ही तरह नॉर्थ ईस्ट के विकास और देश की मुख्यधारा में शामिल होने के प्रयास किए है।

गौरतलब है कि रिजिजू नॉर्थ ईस्ट के एकीकरण के पक्षधर हैं और उत्तर-पूर्वी राज्यों के साथ भेदभाव के खिलाफ हैं। उत्तर-पूर्वी राज्यों में विकास की बयार बहे इसके लिए किरन रिजिजू ने केंद्र में दो दशकों से अटकी पड़ी योजनाओं की तरफ मोदी सरकार का ध्यान खींचा। पीएम मोदी ने एनडीए सरकार के पांच साल के दौरान उत्तर-पूर्वी राज्यों में विकास की तमाम परियोजनाओं की शुरुआत की तो कई योजनाओं को पूरा किया। दिल्ली के हंसराज कॉलेज से बीए(ऑनर्स) करने के बाद दिल्ली विश्वविद्यालय से उन्होंने कानून की पढ़ाई की है। अब किरन रिजिजू टीम मोदी में दूसरी पारी में बड़ी जिम्मेदारी के लिए राजनीतिक, मानसिक और प्रशासनिक तौर पर पांच साल के अनुभव से काफी परिपक्व हो चुके हैं।