असम में तीसरे चरण के चुनाव में 4 सीटों के लिए वोटिंग होगी। इनमें राज्य की सबसे हॉट सीट धुबरी भी शामिल है। पिछले चुनाव में यहां से एआईयूडीएफ के चीफ मौलाना बदरुद्दीन अजमल ने जीत दर्ज की थी। अजमल फिर यहां से चुनाव लड़ रहे हैं। धुबरी संसदीय क्षेत्र में 65 फीसदी मुस्लिम मतदाता है। धुबरी भारत-बांग्लादेश बॉर्डर से लगता जिला है। भाजपा ने इस सीट से अपना उम्मीदवार खड़ा नहीं किया है। यहां से भाजपा की सहयोगी असम गण परिषद चुनाव लड़ रही है। यहां पर प्रत्येक पार्टी के निशाने पर भाजपा और उसका कथित सांप्रदायिक एजेंडा है। भाजपा पर हमले का मतलब है वोटों का ध्रुवीकरण और ज्यादा से ज्यादा मुस्लिम वोटों को हासिल करना।

धुबरी से अजमल को टक्कर दे रहे हैं कांग्रेस के अबु ताहेर बेपारी। एजीपी ने भी यहां से मुस्लिम उम्मीदवार को चुनाव मैदान में उतारा। जावेद इस्लाम असम गण परिषद के और नुरुल इस्लाम चौधरी तृणमूल कांग्रेस के प्रत्याशी हैं। कांग्रेस प्रत्याशी अबु ताहेर बेपारी दो बार विधायक रह चुके हैं। 2017 में कांग्रेस में लौटने से पहले वह कुछ समय के लिए भाजपा में गए थे। धुबरी उन 15 लोकसभा सीटों में शामिल हैं जहां मुस्लिमों की आबादी 50 फीसदी से ज्यादा है। इस सीट से कभी हिंदू उम्मीदवार ने जीत दर्ज नहीं की। डॉ पन्नालाल ओसवाल जो भाजपा के उम्मीदवार थे ने 1998 में 24 फीसदी वोट हासिल किए थे। लेकिन 1999 में उल्फा के उग्रवादियों ने उनकी हत्या कर दी थी। धुबरी संसदीय क्षेत्र में 3 लाख हिंदू बंगाली हैं। इनमें से ज्यादातर नागरिकता (संशोधन) बिल के समर्थन में हैं। धुबरी के 17 लाख वोटरों में से करीब 6 लाख हिंदू हैं। इनमें बड़ा हिस्सा कोच-राजबोंग्शी और हिंदू बंगालियों का है।

बहाती सलमारा गांव में एक रैली को संबोधित करते हुए अजमल कहते हैं, इंशा अल्लाह। इस पर भीड़ कहती है, सुभान अल्लाह, सुभान अल्लाह। इसके बाद अजमल भीड़ से कहते हैं, भाजपा को वोट दोगे? भीड़ कहती है-नहीं। इसके बाद अजमल कहते हैं, मोदी हटाओ, भीड़ कहती है-देश बचाओ। करीब आधे घंटे के भाषण में अजमल वो ही बोलते हैं जिससे मतों का ध्रुवीकरण हो। अजमल नेल्ली(1983) और गुजरात(2002) में हुई सांप्रदायिक हिंसा का जिक्र करते हैं। पेश से बिजनेसमैन अजमल ने 2005 में एआईयूडीएफ की स्थापना की। 2009 में धुबरी सीट से जीत दर्ज करने से पहले वह विधायक बने। उन्होंने चुनावी हलफनामे में अपनी संपत्ति 75 करोड़ घोषित की है। उनकी सालाना आय 2017-18 में 4.29 करोड़ रुपए थी। बकौल अजमल, पहले ही दिन से हम स्पष्ट थे कि हमारी लड़ाई भाजपा के खिलाफ है न कि कांग्रेस के खिलाफ। हमने 14 में से 11 सीटों पर चुनाव नहीं लडऩे का फैसला किया। उन्हें धुबरी में अपना उम्मीदवार नहीं उतारना चाहिए था जहां से मैं लड़ रहा हूं। कांग्रेस से धोखा खाने के बावजूद वह कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन को केन्द्र में समर्थन देंगे।

अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी का कहना है कि धुबरी में कांग्रेस और एआईयूडीएफ के बीच नूरा कुश्ती चल रहा है। उनकी पार्टी को असम में मुस्लिमों के एक वर्ग का समर्थन मिलेगा। पिछले पांच सालों में मुस्लिमों के बीच मोदी जी की लोकप्रियता और स्वीकार्यता काफी बढ़ी है। पूरे भारत में इस बार 30 फीसदी अल्पसंख्यक भाजपा को वोट करेंगे। असम के मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल पीएम किसान, किसानों के लिए कैश सपोर्ट स्कीम सहित कई सरकारी योजनाओं को गिना रहे हैं। उनका कहना है कि इन योजनाओं से बड़ी संख्या में मुस्लिमों को भी फायदा हुआ है। सोनोवाल पूरे विश्वास के साथ कहते हैं कि विपक्ष हमें मुस्लिम विरोधी के रूप में पेश करने की लाख कोशिशें कर लें लेकिन हमें अल्पसंख्यक समुदाय के भी वोट मिलेंगे, लेकिन धुबरी में ज्यादातर मुस्लिम भाजपा के लिए ना कह रहे हैं।