असम की धुबरी लोकसभा सीट पर इस बार रोमांचक मुकाबले के आसार हैं।

लोकसभा चुनाव 2019 में असम की धुबरी लोकसभा सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे ऑल

इंड‍िया युनाइटेड डेमोक्रेट‍िक फ्रंट (एआईयूडीएफ) के बदरुद्दीन अजमल फ‍िर

से चुनाव लड़ रहे हैं। इनका सामना कांग्रेस के अबू ताहेर बेपारी से हो रहा

है। कांग्रेस ने इस बार अपना उम्मीदवार बदल द‍िया है। प‍िछले चुनाव में

बीजेपी यहां से तीसरे नंबर पर रही थी।


इस

बार बीजेपी असम में असम गण पर‍िषद (AGP)और बोडोलैंड पीपुल्स ऑफ फ्रंट

(BPF)के साथ चुनावी मैदान में है। इस वजह से यहां असम गण पर‍िषद के

उम्मीदवार जाबेद इस्लाम, एआईयूडीएफ उम्मीदवार अजमल के क‍िले को ढहाने के

ल‍िए उतरे हैं। तृणमूल कांग्रेस से नुरुल इस्लाम चौधरी, चुनावी मैदान में

अपनी क‍िस्मत आजमा रहे हैं। बता दें क‍ि असम की चार सीटों पर 23 अप्रैल को

तीसरे फेज में मतदान होना है। 10 मार्च को लोकसभा चुनाव 2019 की घोषणा होने

के बाद देशभर में चुनावी माहौल गरमा गया है। 28 मार्च को इस सीट के ल‍िए

नोट‍िफ‍िकेशन न‍िकला, 4 अप्रैल को नोम‍िनेशन की अंत‍िम तारीख, 5 अप्रैल को

उम्मीदवारों की अंत‍िम ल‍िस्ट पर मुहर लगी। अब 23 अप्रैल के मतदान के ल‍िए

सभी दलों ने अपनी ताकत झोंक दी है। लोकसभा चुनाव 2019 के तीसरे चरण में 14

राज्यों की 115 लोकसभा सीटों पर मतदान होना है। मतदान का पर‍िणाम 23 मई को

आना है।


असम

की धुबरी संसदीय सीट पर इस समय एआईयूडीएफ से बदरुद्दीन अजमल सांसद हैं। इस

सीट पर कभी कांग्रेस का प्रभुत्व हुआ करता था, लेकिन बाद में आपसी मतभेदों

के चलते यहां एआईयूडीएफ मजबूत होती चली गई। धुबरी की 10 सीटों में से 4 पर

एआईयूडीएफ, 4 पर कांग्रेस और दो पर बीजेपी काबिज है। यहां से सांसद

बदरुद्दीन अजमल कोलकाता में ममता बनर्जी की महागठबंधन रैली में मुख्य

चेहरों में से एक थे। धुबरी जिला ब्रह्मपुत्र और गदाधर नदी के किनारे बसा

है। यह जिला तीन ओर नदियों से घिरा हुआ है, इसलिए इसे नदियों का शहर भी

कहते हैं। मौजूदा सांसद बदरुद्दीन अजमल पर फर्जी आईकार्ड बनवाकर

बांग्लादेशियों की घुसपैठ कराने के आरोप लगते रहे हैं।


असम

की धुबरी लोकसभा सीट पर कांग्रेस ने सबसे ज्यादा बार जीत दर्ज की। यहां

1951 में हुए पहले लोकसभा चुनाव में प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के प्रत्याशी

अमजद अली ने जीत दर्ज की। 1957 में हुए चुनाव में भी अमजद ही जीते, लेकिन

इस बार उन्होंने कांग्रेस के टिकट से जीत दर्ज की। 1962 के चुनाव में

कांग्रेस प्रत्याशी गयासुद्दीन अहमद  जीते। 1967 के चुनाव में एक बार फिर

प्रजा सोशलिस्ट पार्टी ने इस सीट पर कब्जा किया। इसके बाद 1971 से 2004 तक 9

बार हुए चुनावों में कांग्रेस प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की। 2004 में अनवर

हुसैन ने असम गण परिषद के प्रत्याशी अफजालुर रहमान को 1 लाख 16 हजार 622

मतों से जीत दर्ज की थी।  2009 में हुए 15वें लोकसभा चुनाव में असम

यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट के प्रत्याशी बदरुद्दीन अजमल ने कांग्रेस

प्रत्याशी को 1लाख 84 हजार 419 मतों के बड़े अंतर से जीत दर्ज की। 2014 के

चुनाव में फिर से बदरुद्दीन ने जीत दर्ज की।


धुबरी

संसदीय सीट में कुल 10 विधानसभाएं हैं। इनमें मानकाचर पर कांग्रेस, सलमारा

साउथ पर कांग्रेस, धुबरी पर एआईयूडीएफ, गौरीपुर पर एआईयूडीएफ, गोलकगंज पर

बीजेपी, बिलासीपारा पश्चिमी में एआईयूडीएफ, बिलासीपारा पूर्वी में बीजेपी,

गोलपारा पूर्वी पर कांग्रेस, गोलपारा पश्चिमी पर कांग्रेस और जलेश्वर सीट

एआईयूडीएफ के पास हैं। धुबरी संसदीय सीट में 2011 की जनगणना के अनुसार यहां

27 लाख 71 हजार 883 जनसंख्या है। इसमें 89.1 फीसदी आबादी ग्रामीण जबकि

10.9 प्रतिशत आबादी शहरी है। इस सीट पर 3.54 फीसदी एससी और 5.78 फीसदी एसटी

हैं। धुबरी में कुल मतदाताओं की संख्या 15 लाख 50 हजार 166 है। इसमें

पुरुष मतदाताओं की संख्या 7 लाख 97 हजार 235 है, जबकि महिलाओं की संख्या 7

लाख 52 हजार 931 है।


2014

के चुनाव में बदरुद्दीन अजमल ने  एआईयूडीएफ के टिकट से कांग्रेस प्रत्याशी

वाजिद अली चौधरी को 2 लाख 29 हजार 730 मतों के बड़े अंतर से हराया। उन्हें

कुल 43.27 फीसदी वोट हासिल हुए। बदरुद्दीन को 5 लाख 92 हजार 569 मत मिले,

वहीं दूसरे नंबर पर रहे वाजिद अली चौधरी को 3 लाख 62 हजार 839 वोट मिले थे।

यहां तीसरे नंबर पर बीजेपी प्रत्याशी देबोमय सन्याल ने 2 लाख 98 हजार 985

मत हासिल किए थे। इस सीट पर 5811 लोगों ने किसी भी प्रत्याशी को नहीं चुना,

यानि उन्होंने नोटा का बटन दबाया। इस सीट पर 88.36 फीसदी मतदान हुआ था।