राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद (President Ram Nath Kovind) ने 1971 (1971 War) की लड़ाई में पाकिस्तान की पनडुब्बी गाजी (PNS Ghazi) पर नौसेना के हमले को निर्णायक चोट बताते हुए कहा है कि भारत की यह विजय इतिहास की सबसे जोरदार जीतों में से एक है। तीनों सेनाओं के सर्वोच्च कमांडर कोविंद ने सोमवार को विशाखापतनम में नौसेना के बेड़े का निरीक्षण करने के दौरान 1971 की लड़ाई में नौसेना की शानदार भूमिका का उल्लेख किया।

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आपको बता दें कि 1971 में आईएनएस विक्रांत (INS Vikrant) को डुबाने आई पाकिस्तानी पनडुब्बी पीएनएस गाजी (PNS Ghazi) खुद डूब गई थी। गाजी पनडुब्बी को पाकिस्तान ने अमेरिका से लीज पर लिया था। उस वक्त इस पनडुब्बी का जवाब पूरे दक्षिण एशिया में किसी देश के पास नहीं था। यह 75 दिनों तक पानी के अंदर रह सकती थी और 20 हजार किलोमीटर का सफर तय कर सकती थी। यही नहीं गाजी दुश्मन की नजरों से बचने में भी सक्षम था। कहा जाता है कि गाजी के खौफ वजह से ही 1965 के युद्ध में भारतीय नौसेना ने कराची पर हमले का प्लान टाल दिया था। यहीं डर 1971 के युद्ध में भी मंडरा रहा था।

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1971 का युद्ध शुरू होने से पहले पाकिस्तान ने गाजी को चुपचाप बंगाल की खाड़ी की तरफ रवाना कर दिया। गाजी का मकसद आईएनएस विक्रांत (INS Vikrant) को खोजकर तबाह करना था। अरब सागर को पार करते हुए गाजी बंगाल की खाड़ी में पहुंच भी गया। गाजी अपने मकसद में कामयाब होता इससे पहले ही एडमिरल एन कृष्णन (Admiral N Krishnan) ने ऐसा दांव खेला कि गाजी को समुद्र में समाना पड़ा। एन कृष्णन ने पनडुब्बी रोधी क्षमता से लैस आईएनएस राजपूत (INS Rajput) को आईएनएस विक्रांत होने का नाटक करने के लिए कहा। आईएनएस राजपूत से भारी वायरलेस मैसेज भेजे जाने लगे। मद्रास नेवल बेस को कहा गया कि उनकी तरफ बड़ा युद्धपोत आने वाला है। ये सब गाजी को गुमराह करने के लिए किया जा रहा था और हुआ भी ऐसा ही। पाकिस्तान को लगा कि आईएनएस विक्रांत विशाखापत्तनम में है और गाजी इसे डुबाने के लिए आगे बढ़ने लगा।

भारतीय नौसेना सतर्क हो चुकी थी, वहीं गाजी (pns ghazi) बेखौफ होकर विशाखापत्तनम पहुंच चुका था। विशाखापत्तनम के समुद्र तट पर आईएनएस राजपूत के कैप्टन लेफ्टिनंट कमांडर इंदर (Captain Lieutenant Commander Inder) ने पानी में बड़ी हलचल देखी। उन्होंने अनुमान लगाया कि इतनी हलचल किसी पनडुब्बी के पानी में गोता लगाने से ही हो सकती है। उन्होंने तुरंत समंदर में पनडुब्बी नष्ट करने वाले दो डेफ्थ चार्जर डालने का हुक्म दिया जो जाकर सीधा गाजी से टकराए और इसी के साथ गाजी पानी में समा गया।