मेघालय हार्इ कोर्ट के जज सुदीप रंजन सेन के द्वारा एक मामले की सुनवार्इ के दौरान दिए गए बयान पर सियासी बवाल मच गया है। दरअसल, उन्होंने पीएम मोदी से भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने की अपील की है आैर कहा है कि देश कहीं इस्लामिक देश न बन जाए। उन्होंने यह बयान सोमवार को एक मामले की सुनवार्इ के दौरान दिया। जिस पर अब सियासत शुरू हो गर्इ है। तो आइए जानते हैं सुदीप रंजन सेन के बारे में...

सुदीप रंजन सेन के बारे में
सुदीप रंजन सेन को जन्म 9 मार्च 1957 को मेघालय की राजधानी शिलांग में हुआ था। उन्होंने अपनी स्कूली अौर आगे की पढ़ार्इ शिलांग से की। एनर्इएचयू के तहत शिलांग लाॅ काॅलेज से उन्होंने एलएलबी की डिग्री हासिल की। बीए की डिग्री लेने के बाद उन्होंने एक स्कूल में शिक्षक तौर पर अपने करियर की शुरूआत की थी। 28 मार्च 1989 को उन्होंने सिविल आैर आपराधिक मामलों की प्रैक्टिस शुरू की। 1997 से 7 जुलार्इ 2000 तक उन्होंने मेघालय में सहायक लोक अभियोजक आैर अतिरिक्त सरकारी वकील के तौर पर काम किया।


साल 2000 में मेघालय उच्च न्यायिक सेवा परीक्षा पास करने के बाद सेन सहायक जिला एवं सत्र जज के तौर पर नियुक्त हुए। इसके बाद जनवरी 2002 में वे जिला एवं सत्र न्यायालय के जज बने। 2005 में ग्रेड जिला एवं सत्र जज बने। अप्रैल 2011 में उन्हें सुपर टाइम स्केल अवार्ड से सम्मानित किया गया। एक दिसंबर 2010 से 6 फरवरी 2012 तक गौहाटी न्यायालय में  सेन ने रजिस्ट्रार (प्रशासन) के रूप में काम किया। 6 फरवरी 2012 गौहाटी उच्च न्यायलय में अतिरिक्त न्यायाधीश के पद पर उन्होंने शपथ ली। 23 मार्च 2013 को मेघालय उच्च न्यायालय के अतिरिक्त जज के तौर पर सेन ने शपथ ली। सात जनवरी 2014 को मेघालय उच्च न्यायालय में स्थायी मुख्य जज के तौर पर नियुक्ति हुई।


पीएम मोदी से कानून बनाने की अपील
जस्टिस सेन ने जजमेंट के दौरान कहा, 'मैं अपने प्रिय प्रधानमंत्री, गृह मंत्री, कानून मंत्री और संसद के माननीय सदस्यों से अपील करता हूं कि हिंदुओं, सिखों, जैनों, बौद्ध, पारसी, ईसाई, खासी, जयंतिया और गारो समुदाय के लोगों को किसी भी दस्तावेज या सवाल के बिना नागरिकता दी जाए। इसी तरह के सिद्धांत को पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में से आने वाले लोगों के लिए अपनाया जाना चाहिए। उन्हें भारत में बसने के लिए किसी भी समय आने की अनुमति दी जाए और सरकार उन्हें पुनर्वास उचित तरीके से प्रदान करे। इसके साथ ही उन्हें भारत का नागरिक घोषित किया जाए।'

सेन ने की यूनिफाॅर्म लाॅ की बात
जजमेंट में जस्टिस सेन ने कहा, 'हालांकि मैं इस देश में पीढ़ियों से रहने वाले अपने मुस्लिम भाइयों और बहनों के खिलाफ नहीं हूं। उन्हें इस देश में शांतिपूर्वक रहने का पूरा अधिकार है।' सेन ने यूनिफॉर्म लॉ की भी बात की। उन्होंने कहा कि 'मैं सरकार से यह अपील भी करता हूं कि सभी भारतीयों के लिए यूनिफॉर्म लॉ बनाना चाहिए। जो भी भारतीय कानून और संविधान का विरोध करे उसे देश का नागरिक नहीं माना चाहिए। हमें यह याद रखना जरूरी है कि हम पहले भारतीय हैं, फिर मनुष्य और उसके बाद उस समुदाय के जिससे हम संबंध रखते हैं।'


पीएम मोदी सरकार उठाएगी कदम
जस्टिस सेन ने भारत सरकार की असिस्टेंट सॉलिसिटर जनरल ए.पॉल को निर्देश दिया कि इस आदेश की एक कॉपी, माननीय प्रधानमंत्री, माननीय गृह मंत्री और माननीय कानून मंत्री को भी भेजी जाएं ताकि वह हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी, क्रिश्चियन, खासी, जयंतिया और गारो समुदाय के लोगों की सुरक्षा के लिए उचित कदम उठा सकें। जस्टिस सेन ने इस्लामिक राष्ट्र की धारणा पर भी बोला। उन्होंने कहा कि 'मैं यह साफ करना चाहता हूं कि कोई भी भारत को एक और इस्लामिक राष्ट्र बनाने की कोशिश न करे, वरना यह विश्व और भारत के लिए दुर्भाग्य का दिन होगा। मुझे विश्वास है कि नरेंद्र मोदी की सरकार मामले की गंभीरता को समझेगी और इसके लिए आवश्यक कदम उठाएगी।