किन्नर समाज दुनिया का बहुत ही छोटा तबका है। यद एक ऐसा वर्ग है जिसके बारे में हर कोई जानने की इच्छा रखता है। समय के साथ साथ समाज में किन्नरों के प्रति लोगों की सोच बदलती जा रही है। वैसे को किन्नर एक महिला और पुरूष का रूप है। इनकी वास्तविक परिस्थितियां बहुत ही हैरान कर देने वाली है। इनके कई रोचक तथ्य हैं जो हैरान कर देते हैं। हाल ही में निजी सामाजिक संस्था की ओर से हुए सर्वेक्षण में किन्नरों के लिए जानकारी सामने आयी है।


सर्वेक्षण से सामने आया है कि उत्तर प्रदेश में हर साल लगभग 3 हजार किन्नरों की संख्या लगातार बढ़ रही है। 2011 में किन्नरों की संख्या 1,37,465 थी और 2020 के सर्वेक्षण में इनकी संख्या लगभग 1,64,615 हो गई है। सर्वेक्षण के अनुसार सबसे ज्यादा किन्नर आगरा मंडल में 14915 है। जानकारी के लिए बता दें कि यह सर्वेक्षण रिपोर्ट अबुल कलाम जन सेवा संस्थान के सचिव नाजिम अंसारी और नई दिल्ली की संस्था इंडो ग्लोबल सोशल सोसायटी की ओर से किया गया है। जिसमें किन्नरों की बढ़ती जनसंख्या के बारे में जानकारी दी गई है।


हैरानी कर देने वाली सर्वेक्षण मे यह बात सामने आई है कि किन्नरों की संख्या की बढ़ोतरी में धार्मिक आधार पर 74 प्रतिशत हिन्दू धर्म हैं। इसके बाद 25 प्रतिशत मुस्लिम धर्म से हैं जो कि किन्नर हैं इसी तरह से 1 प्रतिशत सिख धर्म में है। सर्वेक्षण के मुताबिक बताया गया है कि 3-10 साल की उम्र में 29 प्रतिशत किन्नर और 16-22 की उम्र में 30 प्रतिशत किन्नर घर छोड़ देते हैं। सर्वेक्षण के मुताबिक 64 प्रतिशत पुलिस के लोग परेशान करते हैं।  नाजिम अंसारी, सचिव अबुल कलाम आजाद जनसेवा संस्थान ने कहा कि किन्नरों के जीवन के लिए किन्नर वेलफेयर बोर्ड बनाने के मांग की गई है।