पश्चिम बंगाल में हाल ही मे संपन्न हुए विधानसभा चुनाव भारतीय जनता पार्टी (BJP) और तृणमूल कांग्रेस के बीच एक भयंकर लड़ाई देखने को मिली थी। चुनाव के दौरान दोनों पक्षों की ओर से 'खेला होबे' या फिर 'खेल होगा' का नारा जमकर लगाया गया था। 

चुनाव से पहले बीजेपी के एक जबरदस्त गोल में टीएमसी के 30 से अधिक नेताओं ने पाला बदल दिया और चुनाव से ठीक पहले राष्ट्रीय पार्टी में शामिल हो गए। चुनाव परिणाम के कुछ दिन ही बीते थे कि राज्य में एक बार फिर राजनीतिक हलचलें तेज हो गईं हैं। टीएमसी से बागी हुए कई नेता अपनी घरवापसी के लिए लाइन में खड़े हैं। 

सूत्रों का कहना है कि कभी ममता बनर्जी के करीबी रहे बीजेपी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मुकुल रॉय की टीएमसी में वापसी हो सकती है। अभिषेक बनर्जी के अस्पताल जाने के बाद से चर्चा तेज हो गई है, जहां मुकुल रॉय की पत्नी का कोविड -19 इलाज चल रहा है। 

कई अन्य लोगों ने भी टीएमसी में वापसी के लिए इच्छा जताई है। ऐसे लोगों लिस्ट काफी लंबी है। टीएमसी के पूर्व विधायक दीपेंदु बिश्वास ने ममता बनर्जी को पत्र लिखकर माफी मांगी है। टीएमसी से टिकट नहीं मिलने के बाद वह बीजेपी में शामिल हो गए थे। वह उत्तर 24 परगना बशीरहाट दक्षिण निर्वाचन क्षेत्र से विधायक थे। अपने पत्र में बिस्वास ने कहा है कि पार्टी छोड़ना भावनात्मक और बुरा निर्णय था और वह वापस लौटना चाहते थे।

इस सूची में पूर्व टीएमसी विधायक सोनाली गुहा भी शामिल हैं जो कि चुनाव से पहले बीजेपी में शामिल हुईं। सोनाली ने ममता बनर्जी को पार्टी छोड़ने के अपने फैसले पर खेद व्यक्त किया और टीएमसी प्रमुख से उन्हें वापस लेने का आग्रह किया। गुहा ने अपने पत्र में लिखआ है कि जिस तरह एक मछली पानी से बाहर नहीं रह सकती है, मैं तुम्हारे बिना नहीं रह पाउंगी 'दीदी'। मैं आपसे क्षमा चाहती हूं और यदि आप मुझे माफ नहीं करते हैं तो मैं नहीं जी पाऊंगी। इस सूची में सरला मुर्मू, अमोल आचार्य समेत और भी कई नेता शामिल हैं।