आज असम में काती बिहू यानी की कोंगाली बिहू मनाया जा रहा है। काती बिहू शरद ऋतु का एक मेला है। जैसा की नाम है कंगाली बिहू , इस लिए यह बिहू खुशहाली भरा नहीं होता है क्योंकि इस वक़्त किसानों के भोराल (चावल के गोदाम) खाली होते है और फसल की उगाई हो रही होती है।


असम में किसान काती बिहू के दिन शाम के वक़्त अपने अपने घर के आंगन में तुलसी के पौधे के समक्ष और अपने खेतों में जाकर दिया जलाते हैं और भगवन से प्रार्थना करते हैं कि इस वर्ष फसलों की कटाई अच्छी हो, फसलों को कोइ नुकसान न पहुंचे।


शाम के वक़्त अपने जानवरों को भी लोग चावल से बने मिठाई (पीठा ) खिलाकर उनकी भी पूजा करते हैं। आज के दिन रोवा खुआ मनाने की परम्परा है, इस में किसान अपने खेतों में ऊंचे बॉस पर दिया लगाकर कीड़े मकोड़ों से छुटकारा और खराब चीजों को अपने फसल से दूर रखने की ऊपर वाले से प्रार्थना प्रार्थना करते हैं।


पुरे राज्य में काती बिहू को लेकर कई सरकारी और गैरसरकारी कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। काती बिहू के अवसर पर असम के मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने प्रदेशवासियों को बधाई दी है।