कांग्रेस पार्टी में एक बार फिर से विद्रोह के सुर सुनाई दे रहे हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने एक बार फिर पार्टी नेतृत्व पर वादा खिलाफी का आरोप लगाया है। कपिल सिब्बल का कहना है कि सोनिया गांधी ने पार्टी नेताओं के साथ खुली बातचीत कर आंतरिक चुनाव कराने का वादा किया था। करीब एक महीने बीतने के बाद भी अभी तक यह साफ नहीं हो पा रहा है कि ये चुनाव कब कराए जाएंगे। गौरतलब है कि पिछले दिनों पार्टी के 23 असंतुष्ट नेताओं के पत्र लिखकर सोनिया गांधी से आंतरिक चुनाव करने की बात कही थी।

हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में सिब्बल ने किसान आंदोलन को लेकर मोदी सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा, मोदी सरकार ने जो कुछ भी किया है वह बिना सोचे समझे किया है। चाहे वह नोटबंदी हो, जीएसटी या फिर कृषि कानून। सरकार ने बिना पूरी तरह विचार विमर्श किए ही चीजों को गलत तरीके से लागू किया। सिब्बल ने कहा कि यह कुछ वैसा ही जैसे सल्तनत में फैसले लिए जाते थे। फैसले पत्थर पर लकीर जैसे लिए जा रहे हैं। ऐसा लग रहा है जैसे हम मध्यकालीन भारत में पहुंच गए हों। सिब्बल ने कहा कि एक ऐसा कानून जरूरी है जिसमें किसानों को उनकी उपज की न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी हो। ऐसे समय में जब इंडस्ट्रीज को अधिक सहयोग मिल रहा है, उस समय किसान न्यूनतम समर्थन की मूल्य की मांग के लिए आंदोलन कर रहे हैं।

गौरतलब है कि पिछले 6 साल में लोकसभा के साथ ही विभिन्न राज्यों में पार्टी की हार का सामना कर रही कांग्रेस के 23 नेताओं ने पिछले साल अगस्त में पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी को पत्र लिखकर पार्टी में मजबूत बदलाव लाने, जवाबदेही तय करने, नियुक्ति प्रक्रिया को मजबूत बनाने और हार का आकलन करने की मांग की थी। इन नेताओं में पांच पूर्व मुख्यमंत्री, कांग्रेस कार्यसमिति के कई सदस्य, मौजूदा सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री शामिल थे। इसके बाद पिछले साल दिसंबर में सोनिया गांधी ने पार्टी के असंतुष्ट नेताओं से मुलाकात का फैसला किया था।