उत्तराखंड के चार धामों (Char Dham of Uttarakhand) में से एक विश्व विख्यात मां श्री यमुनोत्री धाम (yamunotri dham) के कपाट शीतकाल के लिये शनिवार को भैया दूज (यम द्वितीया) पर अपराह्न 12 बजकर 15 मिनट पर विधि-विधान पूर्वक बंद कर दिये गये। इससे पूर्व आज सुबह आठ बजे भगवान शिव के ग्याहरवें ज्योतिर्लिंग बाबा केदारनाथ धाम के कपाट बन्द हुये हैं। 

कपाट बंद होने के बाद, मां यमुना की जयकारों के साथ, उत्सव डोली ने शीतकालीन गद्दी स्थल खरसाली हेतु प्रस्थान किया। जिलाधिकारी उत्तरकाशी मयूर दीक्षित ने आज बताया कि इस यात्रा वर्ष में श्री यमुनोत्री धाम (yamunotri dham) के दर्शनों को 33 हजार से अधिक तीर्थयात्री पहुंचे। उन्होंने बताया कि इसके साथ ही, गंगोत्री धाम (yamunotri dham) में कुल 33166 तीर्थयात्री पहुंचे। उन्होंने बताया कि दोनों धामों में 66 हजार से अधिक तीर्थ यात्री दर्शन लाभ प्राप्त कर चुके हैं। 

दीक्षित ने बताया कि कोरोना काल एवं प्रतिकूल मौसम के बावजूद, सभी विभागों के परस्पर समन्वयन से तीर्थयात्रा सुचारू रूप से संचालित हुई। देवस्थानम बोर्ड के मीडिया प्रभारी डा. हरीश गौड़ ने बताया कि तीनों धामों के कपाट (Kapat of three dhams) शीतकाल हेतु बंद हो गये है। बदरीनाथ धाम के कपाट 20 नवंबर को शीतकाल हेतु बंद हो जायेंगे। उन्होंने बताया कि शीतकालीन गद्दी स्थलों में मंदिर समितियों अथवा देवस्थानम बोर्ड द्वारा पूजा-अर्चना की जायेगी। उल्लेखनीय है कि धर्मग्रंथों के अनुसार, यमुना जी को यम देव अर्थात धर्मराज जी की बहिन कहा जाता है। यमदेव मृत्यु के देवता है। मां यमुना के दर्शन मात्र से जनमानस को मृत्यु भय से मुक्ति मिलती है।