Kanhaiya Kumar और जिग्नेश मेवाणी अब कांग्रेस में शामिल हो चुके हैं। लेकिन इस सबसे ज्यादा भय अब बिहार में लालू प्रसाद यादव की पार्टी को होने वाला है। क्योंकि कन्हैया कुमार अब उन्हें चुनौति पेश कर सकते हैं।

गौरतलब है कि 2020 में बिहार विधानसभा चुनाव के वक्त लालू ने लोकसभा चुनाव वाली गलती को नहीं दोहराया और सभी वामपंथी दलों के साथ गठबंधन किया। विधानसभा चुनाव में कन्हैया ने आरजेडी प्रत्याशियों के लिए प्रचार-प्रसार भी किया, लेकिन वे खुद चुनाव नहीं लड़े। 2021 में अब जब कन्हैया ने वामपंथियों का दामन छोड़कर कांग्रेस का हाथ थाम लिया है तो एक बार फिर से आरजेडी के अंदर कन्हैया को लेकर खलबली मची हुई है।


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महागठबंधन में शामिल होने से तेजस्वी के समकक्ष एक और युवा नेता खड़ा हो गया है जो भविष्य में उनके बेटे के लिए खतरा हो सकता है। यहां गौर करने वाली बात यह है कि महागठबंधन के घटक दलों में कोई बड़ा चेहरा नहीं होने की वजह से और आरजेडी के सबसे बड़े घटक दल होने की वजह से सभी पार्टियों ने तेजस्वी को ही महागठबंधन का निर्विवाद नेता माना हुआ है।

तेजस्वी के लिए कन्हैया कितना बड़ा खतरा साबित होते हैं, इसका पहला टेस्ट 2024 लोकसभा चुनाव के दौरान ही होगा, जब इस बात का फैसला होगा कि क्या कन्हैया तेजस्वी के नेतृत्व को स्वीकार करके काम करेंगे या फिर तेजस्वी के सामने एक चुनौती बनकर खड़े हो जाएंगे।