कमला हैरिस के शपथ ग्रहण से पहले उनके गांव में जश्न का माहौल है जिसको लेकर महिलाओं ने विशेष पकवान बनाए हैं। वो अमेरिका की पहली अश्वेत महिला उपराष्ट्रपति चुनी गई भारतवंशी कमला हैरिस के गांव में जश्न का माहौल बना हुए है। उनके उपराष्ट्रपति पद की शपथ लेने से पहले गांव के लोगों मे पठाखे चलाकर और मिठाइयां बांटकर एक.दूसरे को बधाई दी।

तमिलनाडु में चेन्नई से करीब 320 किमी दक्षिण में थुलेन्द्रपुरम गांव हैं। करीब 100 साल पहले इसी गांव में कमला हैरिस के नाना का जन्म हुआ था। उसके बाद कमला हैरिस की मां का जन्म भी इसी गांव में हुआ।
कमला हैरिस के शपथ लेने से पहले ही जश्न में डूबे थुलेन्द्रपुरम गांव में लोग मंदिर में इकट्ठा हुएण् इसके बाद कमला हैरिस की सफलता और भारत.अमेरिकी संबंधों को बढ़ाने के लिए विशेष पूजा अर्चना की गई।
कमला हैरिस की मां भारतीय और पिता जमैका के रहने वाले थे। दोनों पढ़ने के लिए अमेरिका गए थे। वहीं पर दोनों ने लव मैरिज कर ली। कमला हैरिस 5 साल की उम्र में भारत आई थी। उस दौरान वह अपने नाना के साथ चेन्नई के बीच पर घूमी थी।

कमला हैरिस अमेरिका के इतिहास में उपराष्ट्रपति बनने वाली पहली महिलाए पहली अश्वेत और पहली एशियन-अमेरिकन नागरिक हैं। राष्ट्रपति के बाद अमेरिका में दूसरा सर्वोच्च पद माना जाता है।

थुलेन्द्रपुरम गांव में महिलाओं ने कमला हैरिस के अमेरिका की उपराष्ट्रपति चुने जाने पर दक्षिण भारत के विशेष व्यंजन बनाए। महिलाओं ने कहा कि कमला का अमेरिकी उपराष्ट्रपति बनना केवल उनके लिए ही नहीं बल्कि भारत की सभी महिलाओं के लिए भी बड़ी बात है।
थुलेन्द्रपुरम गांव के लोगों ने हाथों में कमला हैरिस के पोस्टर ले रखे थे और वे एक.दूसरे को मिठाई बांटकर इस ऐतिहासिक पल की बधाई दे रहे थे। इसके साथ ही पटाखे चलाकर एक दूसरे को बधाई दी गई।