पहाड़ के कालिम्पोंग नगरपालिका के 16 नंबर वार्ड के कमिश्नर बरुण भुजेल की पुलिस कस्टडी में दुखद निधन के बाद दार्जिलिंग पहाड़ की राजनीति में हड़कंप मच गया है। 

इस बेहद दुखद घटना के बाद पहाड़ की जनता ने ममता की तानाशाही सरकार के खिलाफ एक बार फिर मोर्चा खोल दिया है। आज लंबे अंतराल के बाद कालिम्पोंग की जनता ने वीर गोरखा शहीद वरुण भुजेल के समर्थन में समूचा शहर बंद रखा। 

शहर ने आज अपने शहीद संतान को श्रद्धांजलि देते हुए बंगाल पुलिस के दमन पूर्ण नीति का जमकर विरोध प्रदर्शन किया है। कई स्थानों में काले झंडे विरोधस्वरूप लगाए गए हैं। 

इसके अलावा व्यापारिक प्रतिष्ठानों को पूर्ण रूप से बंद रखा गया है। आज एक बार फिर से गोरखा जनमुक्ति मोर्चा के प्रमुख बिमल गुरुंग ने बेहद भावनात्मक ऑडियो मैसेज जनता के सामने रखा है। 

जिसमें भुजेल को श्रद्धांजलि देते हुए पहाड़ के लालची एवं स्वार्थी गोरखा नेताओं को उन्होंने कड़ा संदेश दिया है। साथ ही इस आंदोलन में सभी को एकजुट रहने का आह्वान भी किया गया है। उन्होंने भुजेल के शहादत को व्यर्थ नहीं जाने की बात भी कही है।

भुजेल की मौत के बाद अब सवाल उठ खड़ा हुआ है कि क्या गोरखालैंड के सच्चे समर्थकों को बंगाल सरकार बख्शीश में मौत देगी। भूजल के प्रसंग में यही बात देखने को आई है। 

16 जून को गिरफ्तार किए गए भुजेल बेहद स्वस्थ व्यक्ति थे लेकिन बंगाल पुलिस की हिरासत में उनकी स्वास्थ्य के साथ लगातार लापरवाही बरती गई। जिसके बाद पेनक्रियाज संबंधी गंभीर बीमारी की चपेट में आने के कारण उनकी दुखद मौत हो गई। 

भूजेल की मौत ने पहाड़ को गमगीन कर दिया है। केवल पहाड़ ही नहीं समूची दुनिया में रहने वाले गोर्खाली समुदाय एवं गोरखालैंड प्रेमी उनकी इस दुखद मृत्यु एवं बंगाल सरकार की दुर्भाग्यपूर्ण भावना से की जा रही कार्रवाई के बाद बेहद आहत है।