नेपाल में सिमीकोट हिलसा मार्ग से कैलास मानसरोवर की यात्रा में खराब मौसम के कारण फंसे दो हजार से अधिक यात्रियों में से बीते तीन दिनों में करीब डेढ़ हजार से अधिक यात्रियों को निकाला जा चुका है और अब करीब छह सौ यात्री बाकी हैं, जिन्हें जल्द ही निकाल लिया जाएगा। 


विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने यहां नियमित ब्रीङ्क्षफग में कहा कि बीते तीन दिनों में यात्रियों को निकालने के लिए बहुत व्यापक अभियान चलाया गया। इस दौरान सिमीकोट से 883 यात्रियों को सुरखेत या नेपालगंज लाया गया, जबकि हिलसा से 675 यात्रियों को सिमीकोट पहुंचाया गया। छोटे विमानों से 53 उड़ानें भरीं गयीं, जबकि हेलीकॉप्टर से 142 उड़ानें भरीं गयीं। 

इस समय सुरखेत में 50 और सिमीकोट में 560 यात्री बाकी हैं। एक सवाल के जवाब में कुमार ने कहा कि तीर्थयात्रा को लेकर कोई बहुत चिंताजनक या घबराने वाली बात नहीं है। विदेश मंत्रालय ने एक परामर्श जारी किया है और यात्रियों को सलाह दी है कि चूंकि नेपाल के इन दोनों स्थानों पर ढांचागत सुविधाएं बेहद सीमित हैं और ये केवल हवाई यातायात से जुड़े हैं इसलिए सोचसमझ कर ही इस मार्ग से जाएं। विदेश मंत्रालय ने हाल ही में नेपालगंज, सिमीकोट हिलसा मार्ग पर खराब मौसम के कारण करीब डेढ़ हजार तीर्थयात्रियों के एक सप्ताह से फंसे होने की घटना को देखते हुए आज एक परामर्श जारी किया और कहा कि इस मार्ग से जाने वाले यात्रियों को समझ लेना चाहिए कि सिमीकोट एवं हिलसा में ढांचागत सुविधाएं और स्वास्थ्य सुविधाएं बेहद सीमित हैं। इसलिए यात्रियों को यात्रा पर जाने से पहले सेहत की जांच कराना चाहिए और अपने साथ एक माह तक के लिए जरूरी दवाएं ले जानी चाहिए। 

परामर्श में यह भी कहा गया है कि सिमीकोट एवं हिलसा बाकी दुनिया से केवल हवाई यातायात से जुड़े हैं और वहां केवल छोटे विमान एवं हेलीकॉप्टर ही जा सकते हैं। वहां आने या जाने का अन्य कोई साधन नहीं है। इन छोटे विमानों एवं हेलीकॉप्टरों का उड़ान भरना तभी संभव होता है जब आसपास का मौसम बिल्कुल साफ हो क्योंकि वहां की भौगोलिक स्थिति बहुत ही खतरनाक है। खराब मौसम में तीर्थयात्रियों के यात्रा में फंसने की संभावना अधिक होती है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि तीर्थयात्रियों, राज्य सरकारों एवं टूर ऑपरेटरों को सरकारी परामर्श पर लगातार नजर रखनी चाहिए और उसका अक्षरश: पालन भी करना चाहिए।