तालिबान के अफगानिस्तान पर कब्जा करने के साथ, कला और संस्कृति का लगभग हर क्षेत्र देश से विलुप्त गया है। संगित जैसे सुर को तालिबानियों ने बम धमाकों में तब्दिल कर दिया है। अफगानिस्तान नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ म्यूजिक (ANIM) के छात्र और कर्मचारी अनिश्चित दिनों का सामना कर रहे हैं, जब तालिबान ने हाल ही में घोषणा की थी कि वे देश के अधिग्रहण के बाद संगीत पर प्रतिबंध लगा देंगे।

अफागन में एक तरफ चीखें तो एक तरफ पूरा सन्नाटा पसरा हुआ है। ANIM संस्थान के संस्थापक और निदेशक डॉ अहमन सरमस्त ने बीबीसी को समझाया कि तालिबान के सत्ता में आने के बाद छात्र संगीत विद्यालय में जाने से कैसे डरते हैं। सरमस्त ने कहा कि "वे स्पष्ट रूप से समझते हैं कि अगर वे स्कूल लौटते हैं, तो उन्हें परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं या वे जो कर रहे हैं उसके लिए उन्हें दंडित किया जा सकता है।"

तालिबान के खौफ से कुछ छात्रों ने अपने उपकरण स्कूल को लौटा दिए हैं क्योंकि उन्हें लगा कि यह घर पर रखने के बजाय वहां सुरक्षित है, जहां इस्लामी समूह के लड़ाके उनसे लड़ सकते हैं। काबुल में स्थित स्कूल एक लोकप्रिय संस्थान था जो एक दशक से अधिक समय तक फलता-फूलता रहा है। ANIM देश में छात्रों को अफगान और पश्चिमी शास्त्रीय संगीत दोनों सिखाया जाता था।