खुद को अफगानिस्तान का कार्यवाहक राष्ट्रपति घोषित करने वाले अमरुल्ला सालेह ने कहा है कि इस्लामिक स्टेट-खुरासान (आईएस-के) की जड़ें तालिबान और हक्कानी नेटवर्क में हैं। आईएस-के ने गुरुवार को काबुल हवाई अड्डे पर विनाशकारी बम विस्फोटों की जिम्मेदारी ली थी, जिसमें 13 अमेरिकी सेवा सदस्यों सहित कम से कम 90 लोग मारे गए थे। 

सालेह ने एक ट्वीट में कहा, हमारे पास मौजूद हर सबूत से पता चलता है कि आईएस-के की जड़ें तालिबान और हक्कानी नेटवर्क में हैं, विशेष रूप से काबुल में सक्रिय हैं। आईएस के साथ संबंधों से इनकार करने वाले तालिबानी क्वेटा शूरा पर पाकिस्तान के इनकार के ही समान हैं। तालिबानों ने अपने मास्टर से बहुत अच्छी तरह से सीखा है। तालिबान के एक अधिकारी ने दावा किया कि गुरुवार के हमलों में मारे गए कम से कम 28 अफगान तालिबान के सदस्य थे। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बिडेन ने हमलावरों से बदला लेने की शपथ लेते हुए कहा कि वह उन्हें ढूंढ निकालेंगे।

बता दें कि अमेरिकी टीवी चैनल सीबीएस की रिपोर्ट के अनुसा, काबुल एयरपोर्ट पर हुए हमले में अब तक 90 लोग मारे गए हैं और 150 से ज्‍यादा लोग घायल हो गए हैं। इसमें 13 अमेरिकी सैनिक भी शामिल हैं। व्हाइट हाउस ने कहा कि अफगानिस्तान के काबुल में आतंकवादी हमलों में मारे गए पीड़ितों के सम्मान में 30 अगस्त की शाम तक अमेरिकी ध्वज आधा झुका रहेगा। अफगानिस्तान में अस्पतालों का संचालन करने वाली इटली की एक संस्था ने कहा कि वे हवाईअड्डे पर हमले में घायल 60 लोगों का उपचार कर रहे हैं जबकि 10 घायल ऐसे थे जिन्होंने अस्पताल लाने के दौरान दम तोड़ दिया। अफगानिस्तान में संस्था के प्रबंधक मार्को पुनतिन ने कहा कि सर्जन रात में भी सेवा देंगे। उन्होंने कहा कि घायलों की बढ़ती संख्या को देखते हुए बिस्तरों की संख्या बढ़ाई जा रही। सातवां धमाका देर रात हुआ। हवाई अड्डे पर लगातार छह धमाकों की आवाज पहले सुनाई दी। इसके कुछ देर बाद सातवां धमाका सुना गया।