सुप्रीम कोर्ट में दूसरे नंबर के वरिष्ठतम जज जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि छोटे कार्यकाल की वजह से किसी को चीफ जस्टिस बनने के मौके से वंचित रखना अच्छा नहीं है। अक्टूबर में चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के रिटायरमेंट के बाद जस्टिस गोगोई चीफ जस्टिस पद के दावेदार हैं। हालांकि, अटकलें हैं कि उनकी वरिष्ठता दरकिनार कर सरकार किसी और जज को चीफ जस्टिस बना सकती है।

न्याय प्रणाली में लंबित केस घटाने से जुड़ी एक चर्चा में बेंगलुरू स्थित नेशनल लॉ स्कूल के पूर्व कुलपति प्रो. एनआर माधव मेनन के सुझाव पर जस्टिस गोगोई ने यह प्रतिक्रिया दी। प्रो. मेनन ने चीफ जस्टिस को तय कार्यकाल देने की वकालत की थी। इस पर जस्टिस गोगोई ने कहा, किसी का कार्यकाल छोटा रहेगा, महज इस आधार पर उसे चीफ जस्टिस बनने के मौके से वंचित रखना ठीक नहीं। गत 12 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट के चार जजों की प्रेस कॉन्फ्रेंस में जस्टिस गोगोई भी शामिल थे।

भारत के इतिहास में यह पहला मौका था जब सुप्रीम कोर्ट के चार निवर्तमान जजों ने इस तरह से मीडिया के सामने अपनी बात रखी थी। इन लोगों का कहना था कि सीजेआई हमारी बात भी नहीं सुनते। शीर्ष अदालत में सबकुछ सही नहीं चल रहा है। हम उन्हें समझाने में असफल रहें इसलिए देश के समक्ष पूरी बात रख रहे हैं। इनका आरोप था कि संवेदनशील मामलों को चुनिंदा जजों के पास भेजा जा रहा है। यह लोकतंत्र के लिए खतरा है। जजाें के इस बयान से उस समय बड़ा विवाद खड़ा हो गया था। अब ऐसे में रंजन गोगोई का यह बयान कई मायनों में महत्वपूर्ण है।

बता दें कि 18 नवंबर 1954 को असम में पैदा हुए रंजन गोगोई ने 1978 में अपनी वकालत की पढ़ाई पूरी कर वकील बने थे। वर्ष 2001 के फरवरी माह में उनका चयन गुवाहाटी हाईकोर्ट में स्थायी जज के तौर हुआ था। इसके बाद 9 सितंबर 2010 को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में उनका ट्रांसफर हो गया। वर्ष 2012 में वे सुप्रीम कोर्ट के जज बने।