उच्चतम न्यायालय ने असम नजरबंदी केंद्र मामले की सुनवाई से मुख्य न्यायाधीश को अलग करने संबंधी सामाजिक कार्यकर्ता हर्ष मंदर की एक याचिका गुरुवार को खारिज कर दी, साथ ही उन्हें जज पर भरोसा करने की नसीहत भी दी।


मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने असम के नजरबंदी केंद्र में विदेशी नागरिकों की स्थिति से संबंधित मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता पर उस वक्त नाराजगी जताई जब उन्होंने मुख्य न्यायाधीश को सुनवाई से खुद को अलग कर लेने का आग्रह किया।


न्यायमूर्ति गोगोई ने इस आग्रह को ठुकराते हुए कहा कि एक याचिकाकर्ता मुख्य न्यायाधीश की मंशा पर सवाल उठा रहा है। उन्होंने कहा, 'क्या ये आपके व्यवहार का तरीका है। आपने मंशा पर सवाल उठा दिया? आप पहले न्यायाधीश पर भरोसा करना सीखें। आप देखिए कि आपने किस तरह से संस्थान (न्यायपालिका) को नुकसान पहुंचाया है। अदालत ने मामले में याचिकाकर्ता का नाम हटाकर विधिक सेवा प्राधिकरण को पक्षकार बना दिया और वकील प्रशांत भूषण को मामले में न्याय मित्र नियुक्त कर दिया।'