Russia-Ukraine War से परेशान अमेरिका की कई कड़ी चेतावनी के बाद भी रूस युद्ध बंद नहीं कर रहा है। युद्ध छठे दिन में प्रवेश कर चुका है। इसी यूक्रेन की सेना डट कर रूसी सेना का सामना कर रहा है। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने यूक्रेन पर हमले को लेकर रूस को कड़ी चेतावनी दी। State Of The Union Adress की शुरुआत ही यूक्रेन-रूस युद्ध से की।

अमेरिकी संसद में दिए अपने भाषण में बाइडेन ने यूक्रेन की जनता को भी संदेश दिया और कहा कि रूस ने छह दिन पहले बहुत गलत कदम उठाया। अमेरिका में यह परंपरा लंबे समय से चली आ रही है जिसमें राष्ट्रपति देशवासियों को देश के मौजूदा हालात और भविष्य के विजन से रूबरू करवाते हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति बनने के बाद biden का यह पहला स्टेट ऑफ द यूनियन भाषण था।
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इस संबोधन में रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर बाइडन ने कहा-
1. छह दिन पहले रूस के व्लादिमीर पुतिन ने दुनिया की आजाद नींव को हिलाने की कोशिश की, लेकिन उनका आकलन बहुत गलत था। उन्हें लगा था कि वो यूक्रेन और पूरी दुनिया को रौंद देंगे, लेकिन उन्हें तो सबसे पहले यूक्रेनियन लोगों के संकल्प का ही सामना करना पड़ा। रूस के आगे यूक्रेन के लोग नहीं झुके। यूक्रेनी राष्ट्रपति Volodymyr Zelensky और एक-एक यूक्रेनी नागरिक ने जिस तरह की निर्भयता, साहस और प्रतिबद्धता का परिचय दिया, उसने वास्तव में दुनिया को प्रेरित किया है।
2. यूक्रेनी जनता के झुंड का झुंड रूसी टैंकों के आगे डट रहा है। विद्यार्थी, रिटायर्ड बुजुर्ग से लेकर शिक्षक तक, हर कोई अपने देश की रक्षा के लिए सैनिक बन रहे हैं।
3. जैसा कि राष्ट्रपति जेलेंस्की ने यूरोपियन पार्ल्यामेंट में कहा कि इस संघर्ष में अंधेरे पर प्रकाश की जीत होगी। हम अमेरिकी यूक्रेन के लोगों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं।
4. इतिहास से हमने यह सबक सीखा है- अगर तानाशाह को अपने आक्रमण की कीमत नहीं चुकाना पड़े तो वो ज्यादा उथल-पुथल मचाते हैं। वो आगे बढ़ते रहते हैं। तब अमेरिका और दुनिया इसकी कीमत चुकाता है क्योंकि सबके लिए खतरे बढ़ जाते हैं।

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5. NATO का गठन इसीलिए किया गया कि द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद यूरोप में शांति और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। 29 अन्य देशों के साथ अमेरिका इसका सदस्य है। इसका महत्व है। अमेरिका कूटनीति का महत्व है। अमेरिका का संकल्प महत्व रखता है।
6. पुतिन का यूक्रेन पर ताजा हमला पूरी तरह सोचा-समझा और बिल्कुल बिना उकसावे का है। उन्होंने बातचीत के जरिए मुद्दों के समाधान के लगातार प्रयासों को खारिज किया। उन्हें लगा कि पश्चिमी देश और नाटो प्रतिक्रिया नहीं देंगे। उन्हें लगा कि वो इस देश को तोड़ सकते हैं। उन्होंने सोचा कि वो यूरोप को तोड़ देंगे, लेकिन पुतिन की सोच गलत है।
7. हम तैयार हैं। हम एकजुट हैं और आगे भी एकजुट रहेंगे। हमने बहुत सावधानी और गहराई से तैयारी की। हमने पुतिन से लोहा लेने के लिए यूरोप से लेकर अमेरिका, एशिय और अफ्रीकी महादेशों तक के सभी आजादी समर्थक देशों के साथ महीनों बातचीत की और उन्हें एक प्लैटफॉर्म पर लाया।
8. यूरोप में अपने सहयोगी देशों को साथ लाने के लिए हमने घंटों मेहनत की। हमने आपस में बातचीत की कि पुतिन क्या प्लानिंग कर रहे हैं। हमें पता था कि पुतिन अपने आक्रमण को न्यायोचित ठहराने की कोशिश में क्या-क्या करेंगे। हमने रूस के झूठ के सामने सच्चाई रखी। यह काम कर गया।
9. फ्रांस, जर्मनी, इटली समेत यूरोपियन यूनियन के 27 देशों के अलावा यूनाइटेड किंगडम, कनाडा, जापान, कोरिया, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और कई अन्य देश, यहां तक कि स्विट्जरलैंड भी रूस के खिलाफ यूक्रेन के लोगों का समर्थन दे रहे हैं।
10. पुतिन पहले से ज्यादा दुनिया के लिए खतरा बन गए हैं। आज हम अपने सहयोगियों के साथ रूस पर बेहद घातक आर्थिक पाबंदियां लगा रहे हैं। हम उसे इंटरनैशनल फाइनैंशल सिस्टम से अलग कर चुके हैं। हमने रूस के सेंट्रल बैंक को अलग-थलग कर दिया है। हमने पुतिन के 630 अरब डॉलर का वॉर फंड बेकार कर दिया है। हमने टेक्नॉलजी तक रूस की पहुंच काट दी जिससे आने वाले वर्षों में रूस की आर्थिक और सैन्य क्षमता पर गहरा असर होगा।