दिल्ली की एक अदालत जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के पूर्व छात्र नेता उमर खालिद की जमानत याचिका पर सुनवाई करेगी। खालिद को पूर्वोत्तर दिल्ली दंगों के मामले में कड़े गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया गया था। एचटी ने बताया कि दिल्ली पुलिस ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि यह मामला "एक बड़ी साजिश" से संबंधित है।

खालिद की याचिका के जवाब में, अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) आलोक कुमार ने कहा कि अभियोजन पक्ष दायर आरोपपत्र का हवाला देकर अदालत के समक्ष उनके खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला प्रदर्शित करेगा। कुमार ने कहा  कि “आवेदन में कोई योग्यता नहीं है जैसा कि खुलासा किया जाएगा। और चार्जशीट के संदर्भ में इस अदालत के समक्ष प्रदर्शन किया और इस तरह अभियोजन आवेदन का विस्तृत जवाब दाखिल करने की मांग नहीं करता है, ”।

बताया गया है कि मामले में गिरफ्तार किए गए 21 लोगों में से पुलिस ने खालिद समेत 18 को चार्जशीट दे दी है। खालिद सहित कई अन्य पर इस मामले में आतंकवाद विरोधी यूएपीए कानून के तहत मामला दर्ज किया गया है। उन सभी पर फरवरी 2020 की हिंसा का मास्टरमाइंड होने का आरोप है, जिसमें 53 लोग मारे गए थे और 700 से अधिक घायल हो गए थे। 

जानकारी के लिए बता दें कि इस मामले में खालिद के अलावा, जामिया मिलिया इस्लामिया के छात्र आसिफ इकबाल तन्हा, जेएनयू के छात्र नताशा नरवाल और देवांगना कलिता, जामिया समन्वय समिति के सदस्य सफूरा जरगर, आप के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन और कई अन्य पर भी मामले में कड़े कानून के तहत मामला दर्ज किया गया है। तन्हा, जेएनयू के छात्र नरवाल और देवांगना, जामिया के छात्र सफूरा जरगर को पहले ही जमानत मिल चुकी है। खालिद को इस साल की शुरुआत में हुए दंगों से जुड़े एक अन्य मामले में जमानत मिली थी।