त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में भाजपा के सबसे अमीर विधायक जिष्णु देबबर्मा प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं। वहीं भाजपा की त्रिपुरा इकाई के अध्यक्ष बिप्लब देब राज्य के नए मुख्यमंत्री होंगे। बनमालीपुर से विधायक देब को मंगलवार को पार्टी विधायक दल की बैठक में नेता चुना गया।


केन्द्रीय मंत्री नितिन गड़करी ने नव निर्वाचित विधायकों की बैठक के बाद देव को विधायक दल का नेता चुने जाने की घोषण की। उन्होंने बताया कि देब को सर्वसम्मति से विधायक दल का नेता चुना गया। गडकरी ने बताया की जिष्णु देबबर्मा उपमुख्यमंत्री होंगे। घोषणा के तुरंत बाद देब, गडकरी के साथ राजभवन पहुंचे और राज्यपाल तथागत रॉय से मिलकर भाजपा सरकार बनाने का दावा पेश किया।


नई सरकार 9 मार्च को स्वामी विवेकानंद मैदान में शपथ लेगी। बीजेपी कार्यक्रम को भव्य बनाने की तैयारी में है। शपथ समारोह में कई बीजेपी राज्यों के मुख्यमंत्री भी हिस्सा ले सकते हैं। इसके अलावा पीएम मोदी भी मौजूद रहेंगे। बर्मा के पास11 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति घोषित है।


बता दें कि जिष्णु देवबर्मा भाजपा की राज्य कार्यकारिणी के सदस्य हैं। बर्मा ने चालीराम सीट से जीत दर्ज की है जहां हमेशा से ही लेफ्ट का दबदबा रहा है। 10 में से 5 बार सीपीएम, 3 बार कांग्रेस और एक एक बार सीपीआई व टीयूएस के उम्मीदवार ने इस सीट से जीत दर्ज की है।


पिछले चुनाव(2013) में यहां से सीपीएम के रामेन्द्र नारायण देबबर्मा ने जीत दर्ज की थी। उन्होंने कांग्रेस के हिमानी देबबर्मा को 1,341 वोटों से हराया था। देबबर्मा को कुल 16, 479 वोट पड़े थे जबकि हिमानी को 15,138।


आपको बता दें कि 3 मार्च को आए नतीजों के बाद से ही त्रिपुरा में हिंसा की स्थिति बनी हुई है। बीजेपी की जीत के बाद राज्य के कई इलाकों से तोडफ़ोड़ और मारपीट की खबर आ रही है। 25 साल से सत्ता में काबिज रही सीपीआई (एम) आरोप लगा रही है कि बीजेपी-आइपीएफटी कार्यकर्ता हिंसा पर उतारू हो चुके हैं। वे न सिर्फ वामपंथी दफ्तरों में तोडफ़ोड़ कर रहे हैं बल्कि कार्यकर्ताओं के घरों पर भी हमला कर उन्हें निशाना बना रहे हैं। आरोप है कि बीजेपी समर्थकों ने साउथ त्रिपुरा डिस्ट्रिक्ट के बेलोनिया सबडिविजन में बुलडोजर की मदद से रूसी क्रांति के नायक व्लादिमीर लेनिन की मूर्ति को ढहा दिया गया। साम्यवादी विचारधारा के नायक लेनिन की मूर्ति तोड़े जाने के बाद से वामपंथी दल और उनके कैडर नाराज हैं।


तीन मार्च को आये परिणामों में भाजपा ने त्रिपुरा में माक्र्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के 25 साल के शासन का अंत किया। साठ सदस्यीय विधानसभा की 59 सीटों के आये परिणामों में भाजपा को 35 सीटों पर विजय मिली थी। भाजपा ने विधानसभा चुनाव आईएफजीटी के साथ मिलकर लडा था। आईएफजीटी को आठ सीटें मिली थीं।