जियो 5जी नेटवर्क को जल्द भारत में रोलआउट करने जा रहा है. जियो पहले चरण में भारत के 1000 शहरों में 5 जी नेटवर्क उपलब्ध कराएगा. कंपनी पिछले लंबे वक्त से 5जी टेस्टिंग कर रही है. जियो का दावा है कि उसका 5जी पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक पर बेस्ड है. जियो की ओर से अपने 5जी नेटवर्क पर हेल्थकेयर और इंडस्ट्रियल ऑटोमेशन की टेस्टिंग की जा रही है. 5जी की तेजी से तैनाती के लिए कंपनी बुनियादी ढ़ाचें को भी तेजी से बढ़ा रही है. साइट्स पर फाइबर और बिजली की उपलब्ध्ता को भी बढ़ाया जा रहा है. ताकी जब 5जी रोलआउट का वक्त आए तो इसमें कोई रुकावट या देर न हो.

जियो 5जी नेटवर्क को सबसे पहले उन इलाकों में रोलआउट किया जाएगा, जहां डेटा की ज्यादा खपत होती है. कंपनी की तरफ से ऐसे इलाकों और ग्राहकों की पहचान के लिए हीट मैप्स, 3 डी मैप्स और रे ट्रेसिंग टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जा रहा है. जियो 5जी नेटवर्क की डिमांड वाले ग्राहकों के लिए मजबूत नेटवर्क बनाया जा सके. इसका खुलासा रिलायंस इंडस्ट्रीज के साल 2021 की तीसरी तिमाही नतीजों से मालूम चला है. 

ग्राहक आधारित 5जी सॉल्युशन्स को डेवलेप करने के लिए जियो ने कई टीमें बनाई हैं. जिन्हें भारत के साथ साथ अमेरिका में भी तैनात किया गया है, जिसे वो विभिन्न प्रकार के 5जी सॉल्युशन्स को डेवलेप कर सकें. कंपनी का मानना है कि यह टीमें ऐसे 5जी सॉल्युशन्स तैयार करेंगी जो तकनीकी स्तर पर दुनिया के समकक्ष या उनसे बेहतर होंगे. इसके अलावा कंपनी ने यूरोप में एक टेक्नोलॉजी टीम भी बनाई है जो 5जी से आगे की तैयारी करेगी.

रिलायंस जियो का एआरपीयू (यानी औसत रेवेन्यू प्रति ग्राहक प्रति माह) भी बढ़ा है. प्रति उपभोक्ता प्रति माह एआरपीयू बढ़कर 151.6 रुपये पर जा पहुंचा है. जिससे बेहतर सिम कंसोलिडेशन और हाल की दामों में करीब 20 फीसदी की बढ़ोतरी को माना जा रहा है. जियो नेटवर्क पर हर ग्राहक ने प्रत्येक माह 18.4 जीबी की डेटा खपत की और करीब 901 मिनट बात की. जियो ने इस तिमाही करीब 1 करोड़ 20 लाख ग्राहकों को अपने नेटवर्क से जोड़ा. लेकिन तिमाही में जियो की कुल उपभोक्ता संख्या में 84 लाख की कमी आई है. जियो का ग्राहक आधार अब 42 करोड़ 10 लाख के करीब है, जबकि जियो फ़ाइबर के ग्राहकों की 50 लाख के आंकड़े को पार कर लिया है.