सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार को बड़ा झटका देते हुए वर्ष 2013 में झीरम घाटी नक्सली हमले संबंधी याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया। इस हमले में पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल, राज्य के कई बड़े कांग्रेस नेताओं समेत 29 लोग मारे गए थे। राज्य सरकार ने शीर्ष अदालत से मांग की थी कि वह न्यायिक जांच आयोग को इस मामले में और गवाहों से पूछताछ करने का निर्देश दे। सरकार ने आयोग द्वारा इनकार किए जाने के बाद सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था।

राज्य सरकार का प्रतिनिधित्व करने वाले वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने जस्टिस अशोक भूषण, आर.सुभाष रेड्डी और एम.आर. शाह की पीठ के समक्ष मामला रखा और कहा कि सरकार ने इसे लेकर हलफनामा दाखिल किया था। इस पर पीठ ने जवाब दिया कि यह आयोग का आदेश नहीं था, बल्कि जो लोग पूछताछ करवाना चाहते हैं, उन्हें अपना हलफनामा दाखिल करना चाहिए। सिंघवी ने जवाब दिया कि पीठ का कहना सही है, क्योंकि गवाहों ने हलफनामा दाखिल नहीं किया है, लेकिन राज्य सरकार ने दाखिल किया है। साथ ही कहा, ‘‘इसे दाखिल किए हुए एक वर्ष हो गया है और अब तक कुछ नहीं हुआ है।’’

तब पीठ ने कहा, ‘‘हो सकता है कि आपने आयोग का कार्यकाल बढ़ाया हो लेकिन उसने कार्यवाही करनी बंद कर दी हो।’’ सिंघवी ने पीठ के समक्ष कहा कि पिछले साल अक्टूबर में दो गवाहों की जांच की गई थी, लेकिन आयोग ने राज्य द्वारा अनुशंसित छह गवाहों की जांच नहीं की। पीठ ने इस अपील को खारिज कर दिया और कहा कि आयोग ने पहले ही कार्यवाही बंद कर दी है।