मणिपुर में उग्रवादियों के साथ मुठभेड़ में शहीद हुए असम राइफल के जवान जय प्रकाश ओरान की पार्थिव देह गुरुवार शाम रांची लाई गई। जब ओरान का पार्थिव देह बिरसा मुंडा एयरपोर्ट पर लाई गई तब वहां पर राज्यपाल द्रोपदी मुर्मु, ग्रामीण विकास मंत्री नीलकांत सिंह मुंडा और पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी मौजूद थे। इन सभी नेताओं ने शहीद जवान को श्रद्धांजलि दी। इसके बाद असम राइफल्स के राइफलमैन ओरान(32) की पार्थिव देह रांची जिले में स्थित उनके पैतृक गांव ले जाई गई, जहां उनका अंतिम संस्कार किया गया। बुधवार सुबह मणिपुर के चंदेल जिले के नगा बहुल साजिक तामपेक में असम राइफल्स के जवानों की उग्रवादियों से मुठभेड़ हुई थी। इसमें ओरान गंभीर रूप से घायल हो गए। बाद में सैन्य अस्पताल में उनका निधन हो गया।

मुठभेड़ में एक अन्य जवान घायल हुआ था जबकि एक उग्रवादी मारा गया था। मुठभेड़ कोरकॉम के साथ हुई,जो 6 उग्रवादी संगठनों का अंब्रेला ग्रुप है। सोमवार को चंदेल जिले में हुए आईईडी ब्लास्ट में असम राइफल्स के दो जवान शहीद हो गए थे। इसके बाद राज्य सरकार ने चंदेल में पुलिस व अर्धसैनिक बलों को भेजा था। झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवर दास ने ओरान की मृत्यु गहरा दुख प्रकट किया। उन्होंने जवान की बहादुरी को सलाम करते हुए कहा, झारखंड के लोग शोकसंतप्त परिवार के साथ हैं। मुख्यमंत्री ने शहीद जवान के परिवार को 10 लाख रुपए का मुआवजा देने की घोषणा की। ओरान की पार्थिव देह को उनके पैतृक गांव नवादिह ले जाया गया,जो रांची से 40 किलोमीटर दूर है। यहां शुक्रवार को उनका अंतिम संस्कार किया गया।
ओरान 2006 में भारतीय सेना में शामिल हुए थे। वह अपने पीछे पत्नी संगीता और दो बेटियों को छोड़कर गए हैं। शहीद जवान के पिता शुक्रा ओरान किसान हैं जबकि उनकी मां लक्ष्मी गृहणी है। ओरान के भाई बसंत ने बताया कि उन्हें बुधवार सुबह 6 बजे कॉल आया, तब उन्हें यह दुखद समाचार मिला। बसंत ने बताया कि सोमवार को उनकी अपने भाई से बात हुई थी। ओरान ने कहा था,वह 21 नवंबर को छुट्टी लेकर घर आएगा। वह अपनी छोटी बेटी के 6 दिसंबर को आने वाले पहले जन्मदिन को मनाने के लिए बेसब्री से इंतजार कर रहा था। ओरान आखिरी बार मार्च में घर आए थे। उस वक्त सरहुल फेस्टिवल था।