वर्ष 2006 में गठित झारखंड विकास मोर्चा प्रजातांत्रिक (झाविमो) का अस्तित्व 17 फरवरी को समाप्त हो जाएगा। झाविमो प्रमुख बाबूलाल मरांडी अपनी पार्टी के पंचायत स्तर से लेकर केंद्रीय समिति के सदस्यों और पदाधिकारियों के साथ औपचारिक रूप से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हो जाएंगे।

 भाजपा में शामिल होने के बाद बाबूलाल मरांडी के समक्ष चार विकल्प रहेंगे। इन्हीं में से एक को अपना कर वह अपने राजनीतिक भविष्य की दिशा तय करेंगे।भाजपा के उच्च पदस्थ सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार बाबूलाल मरांडी को पार्टी के विलय के बाद झारखंड विधानसभा में पार्टी विधायक दल के नेता का पद लेने का ऑफर दिया गया है।भाजपा विधायक दल का नेता बनते ही उन्हें विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष का भी दर्जा मिल जाएगा। 

बाबूलाल मरांडी ने वर्ष 2019 के विधानसभा चुनाव में धनवार विधानसभा सीट से जीत हासिल की है। बाबूलाल मरांडी के पास दूसरा विकल्प केंद्रीय मंत्री बनने, झारखंड में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष की बागडोर संभालने का भी है। वहीं अंतिम और चौथा विकल्प यह भी है कि वे बिना कोई पद लिए भाजपा के लिए आगामी लोकसभा और विधानसभा चुनाव के लिए संघर्ष की भूमिका तैयार करें। फिलहाल बाबूलाल मरांडी या भाजपा ने इस मुद्दे पर चुप्पी साध ली है, लेकिन यह उम्मीद की जा रही है कि 17 फरवरी को 14 वर्षों के बाद बाबूलाल मरांडी की भाजपा में घर वापसी के बाद सबकुछ साफ हो जाएगा।

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