नीतीश कुमार के हाथ से बिहार निकल सकता है क्योंकि उनकी की पार्टी के एक नेता ने लालू प्रसाद यादव के साथ मुलाकात की है। हालांकि बिहार में अभी विधानसभा चुनाव में भले ही देरी हो, लेकिन नेता अभी से अपने राजनीतिक भविष्य के लिए सुरक्षित ठिकाने तलाशने लगे हैं। इसी क्रम में जनता दल (यूनाइटेड) के विधान पार्षद मोहम्मद जावेद इकबाल अंसारी शनिवार को रांची पहुंचकर रिम्स के पेइंग वार्ड में भर्ती चारा घोटाला मामले में सजायाफ्ता राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव से मुलाकात की।

मुलाकात के बाद उन्होंने स्पष्ट कहा कि बिहार के लोग अब युवा नेतृत्व की तलाश में हैं। समझा जा सकता है कि उनका इशारा राजद नेता तेजस्वी प्रसाद की ओर है।

लालू प्रसाद से मुलाकात के बाद पत्रकारों से बातचीत में अंसारी ने कहा कि राजद अध्यक्ष और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद लंबे समय से बीमार हैं। उनकी बीमारी का हाल जानने यहां आया हूं। उन्होंने लालू प्रसाद के स्वास्थ्य पर चिंता जताई।

जद (यू) के विधान पार्षद अंसारी ने कहा कि मैं राजनीति में लालू जी के कारण हूं। लालू जी ही मेरी राजनीतिक जीवन के जन्मदाता हैं। हालांकि मैं आज भी जद (यू) का एमएलसी हूं। उन्होंने यह भी कहा कि बिहार को अब एक युवा नेतृत्व की जरूरत है। बिहार की जनता बदलाव चाहती है।

उन्होंने जद (यू) के संबंध में पूछे जाने पर कहा कि जद (यू) नागरिकता संशोधन कानून(सीएए) को लेकर जिस प्रकार दो धड़ों में बंट गया है, उससे असमंजस की स्थिति उत्पन्न हो गई है। इसे पार्टी के लिए हानिकारक बताते हुए उन्होंने कहा कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बारे में मुझे कुछ बताने की जरूरत नहीं है।

इस मुलाकात के बाद जद (यू) के नेता कुछ भी खुलकर नहीं बोल रहे हैं, परंतु राजद के विधायक शिवचंद्र राम ने दावा किया कि जद(यू) के 30-35 विधायक राजद में आना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि जद(यू) के बहुत से विधायक, विधान पार्षद, लालू यादव और तेजस्वी यादव की संपर्क में हैं। बहुत से लोग लालू यादव से मिल चुके हैं तो बहुत से मिलने जाने वाले हैं। जद(यू) के विधायक एनआरसी को लेकर नीतीश कुमार के स्टैंड से नाराज हैं।

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