अब चीन और उत्‍तर कोरिया पर संकट आने वाला है क्योंकि जापान अपने रक्षा बजट में भारी बढ़ोतरी करने जा रहा है। जापान के मंत्रिमंडल ने देश के रक्षा बजट को लगातार नौवीं बार बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। जापान सरकार चीन और उत्तर कोरिया से संभावित खतरे से निपटने के लिये लंबी दूरी की क्रूज मिसाइलें और रेडार से बच निकलने में सक्षम लड़ाकू विमान विकसित करने के लिये रक्षा बजट बढ़ाने जा रही है। वित्त वर्ष 2021 में रेकॉर्ड 5.34 ट्रिल्‍यन येन (51.7 अरब अमेरिकी डॉलर) का रक्षा बजट पेश करने की योजना है।

प्रधानमंत्री योशिहिदे सुगा के कार्यकाल का यह पहला बजट होगा। यह बजट मौजूदा वित्त वर्ष के रक्षा बजट से 1.1 प्रतिशत अधिक होगा। अगले साल की शुरुआत में इसे 106 ट्रिल्‍यन येन (10.3 खरब अमेरिकी डॉलर) के राष्ट्रीय बजट के साथ संसद की मंजूरी दी जाएगी। रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि प्रस्तावित बजट में लंबी दूरी की मिसाइलें विकसित करने का खर्च भी शामिल है, जिन्हें विध्वंसक या लड़ाकू विमानों से दागा जा सकता है।

ये मिसाइलें सुगा मंत्रिमंडल द्वारा पेश की गई नयी मिसाइल योजना का हिस्सा हैं। इस योजना को अमल में लाकर जापान पूर्वी चीन सागर में अपने नियंत्रण वाले उन टापुओं में मिसाइलों की तैनाती बढ़ा सकेगा, जिनपर चीन भी अपना दावा जताता है। बता दें कि दक्षिणी चीन सागर में ड्रैगन की बढ़ती दादागिरी के खिलाफ जापान नई तिकड़ी बना रहा है। जापानी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अगले साल मई में अमेरिका और फ्रांस की नौसेना के साथ जापान अपने एक द्वीप के नजदीक बड़े पैमाने पर युद्धाभ्यास करेगा।

जापान ने इससे पहले अमेरिका और फ्रांस के साथ कोई त्रिपक्षीय युद्धाभ्यास नहीं किया है। हाल के दिनों में जापानी क्षेत्र में चीन की नेवी और एयरफोर्स की घुसपैठ भी काफी तेज हुई है। यह युद्धाभ्यास जापान के निर्जन द्वीपों में से एक पर समुद्री और जमीनी इलाकों में किया जाएगा। इस दौरान तीनों देशों की नौसेना प्राकृतिक आपदा के दौरान राहत और बचाव कार्य की तैयारियों को जाचेंगी। हालांकि, विशेषज्ञों ने आशंका जताई है कि इसका प्रमुख उद्देश्य चीन के खिलाफ रक्षात्मक तैयारियों को बढ़ाना है।

जापानी मीडिया में का दावा है कि इस संयुक्त अभ्यास का उद्देश्य पूर्वी चीन सागर में जापानी नियंत्रित द्वीपों का दावा करना है। हालांकि, जापान का रक्षा मंत्रालय में इस अभ्यास को लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं जारी किया है। वहीं, फ्रांसीसी नौसेना के प्रमुख एडमिरल पियरे वांडियर ने एक इंटरव्यू में कहा कि हम इस क्षेत्र में अपनी उपस्थिति को दिखाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि इससे जापान-फ्रांस सहयोग का संदेश भी जाएगा।