जम्मू-कश्मीर के अंतिम रियासत के शासक महाराजा हरि सिंह के पोते और विधान परिषद के पूर्व सदस्य विक्रमादित्य सिंह ने मंगलवार को कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया। अपने इस्तीफे के कारण पर उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर पर उनकी स्थिति कांग्रेस के साथ मेल नहीं खाती है।

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उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को लिखे पत्र में कहा, मैं भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देता हूं। मेरा मानना है कि कांग्रेस जम्मू एवं कश्मीर के लोगों की भावनाओं और आकांक्षाओं को महसूस करने और व्यक्त कर पाने में असमर्थ है। विक्रमादित्य सिंह, जो पार्टी के वरिष्ठ नेता, (कर्ण सिंह के बेटे हैं) ने ट्विटर पर लिखा, जम्मू-कश्मीर के महत्वपूर्ण मुद्दों पर राष्ट्र हित को लेकर मेरी स्थिति कांग्रेस पार्टी के साथ मेल नहीं खाती है। पार्टी जमीनी हकीकत से कट चुकी है।

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वहीं दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश में हाल के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की अपमानजनक हार ने पार्टी स्तर पर अंदरूनी कलह को हवा दी है। पार्टी नेता अब कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं, जो उत्तर प्रदेश की प्रभारी हैं। हाल ही में पार्टी से निकाले गए एआईसीसी सदस्य जीशान हैदर ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को पत्र लिखकर कहा है कि पार्टी की परंपरा को ध्यान में रखते हुए प्रियंका को भी विधानसभा चुनाव में पार्टी के निराशाजनक प्रदर्शन की जिम्मेदारी लेनी चाहिए और पार्टी से इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने कहा कि 2012 में तत्कालीन पार्टी प्रभारी दिग्विजय सिंह और यूपीसीसी अध्यक्ष रीता बहुगुणा जोशी ने चुनावी हार के बाद इस्तीफा दे दिया था। इसी तरह, प्रभारी गुलाम नबी आजाद और यूपीसीसी अध्यक्ष राज बब्बर ने भी 2017 के चुनाव के बाद हार की जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दे दिया। हैदर ने लिखा कि जहां यूपीसीसी अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू को इस्तीफा देने के लिए कहा गया है, वहीं प्रियंका के इस्तीफे पर कुछ नहीं कहा गया है। उन्होंने कहा, पार्टी ने जिन 400 सीटों पर चुनाव लड़ा, उनमें से 387 सेटों पर कांग्रेस उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई है। यह सीधे प्रियंका और उनकी टीम के प्रदर्शन को दर्शाता है। हैदर को स्पष्ट रूप से पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था क्योंकि उन्होंने प्रियंका के निजी सचिव संदीप सिंह के ‘अधिकार’ पर सवाल उठाया था।