इंडो तिब्बतीय बार्डर पुलिस(आईटीबीपी ) की 11वीं वाहिनी ने उत्तरी सिक्किम पैगांग में अपना 56वां स्थापना दिवस मनाया गया। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में वाहिनी के सेनानायक राजेश कुमार तोमर ने ध्वज फहराकर शुभारंभ किया और जवानों द्वारा परेड की सलामी ली।

परेड का नेतृत्व सहायक सेनानायक हिम्मत सिंह ने किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के तौर पर मौजूद सेनानायक राजेश तोमर ने कहा कि हिमालय की दुर्गम चोटियों पर भी आईटीबीपी ने सीमा रक्षा के 56 गौरवमयी वर्ष पूरे किए। उन्होने सेवानिवृत्त जवानों के साथ साथ सेवारत जवानों को विशेष तौर पर धन्यवाद देते हुए कहा कि बिना जवानों के सहयोग और निष्ठा के कोई भी बल सफलता नहीं प्राप्त कर सकता है। तोमर ने इस मौके पर जवानों द्वारा दी गई शहादत का विशेष तौर पर नमन करते हुए श्रद्धा सुमन अर्पित किए।


उन्होने विपरीत परिस्थितियों में भी जवानों को मातृभूमि के लिए समर्पित बताते हुए सेवाएं और सुरक्षा देने के कार्य को साहसी तथा सराहनीय करार दिया। इस सर्वोच्च बलिदान व त्याग के लिए हम जवानों के आभारी हैं। तोमर ने 24 अक्टूबर 1962 से काराकोरम दर्रे से लिपुलेख दर्रा तथा भारत-चीन सीमा पर आइटीबीपी की तैनाती की जानकारी दी।


इतिहास का जिक्र करते हुए कमांड प्रमुख ने बताया कि उस वक्त मात्र 4 वाहिनी गठित कर बल को क्रियाशील किया गया था तथा वर्तमान में आईटीबीपी की 60 वाहिनी कार्य द्वारा देश सेवा में अग्रसर रहने की जानकारी दी। सिक्किम स्थित भारत चीन सीमावर्ती क्षेत्र में 9000 से 18500 फीट की ऊंचाई पर हिमालय की दुर्गम चोटियों में आईटीबीपी द्वारा चौकसी करने की बात कही।

जिनमें ओपी दोर्जिला, केराग व गोराला फार्वड पोस्ट मुख्य रूप से शामिल है। तोमर ने 11वीं वाहिनी के जवानों द्वारा सुरक्षा के साथ साथ आस पास के क्षेत्र में सफाई अभियान तथा जागरूकता शिविरों के माध्यम से सामाजिक योगदान देने का भी जिक्र किया।