इस समय दुनिया करीब 2 सालों से दुनिया कोरोना वायरस महामारी की चपेट में है। महामारियों का भी अपना एक इतिहास है। दुनिया कोरोना वायरस से पहले भी कई वैश्विक रोगों से लड़ चुका है। भले ही दुनिया इनसे जंग जीतती आई है लेकिन ये महामारियां बड़ी संख्या में लोगों की मौत के लिए जिम्मेदार बनती हैं। ऐसा ही कुछ हुआ था इटली के एक द्वीप पर जहां महामारी के चलते लाखों लोगों को जिंदा जलाए जाने का दावा किया जाता है। इस रहस्यमय द्वीप को दुनिया की सबसे डरावनी जगहों में से एक माना जाता है।

इटली के वेनिस और लिडो के बीच इस जगह का नाम है पोवेग्लिया द्वीप (Poveglia Island), जो वेनेशियन खाड़ी में स्थित है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस द्वीप का इतिहास 16वीं शताब्दी से जुड़ा है जब इटली में प्लेग महामारी फैली थी। पोवेग्लिया द्वीप पर प्लेग के मरीजों को रखा जाता था। यह महामारी लगातार बढ़ती जा रही थी और शासकों के हाथ से बाहर हो चुकी थी। कहा जाता है कि प्लेग पर काबू पाने के लिए शासकों ने इस द्वीप पर करीब 1 लाख 60 हजार लोगों को जिंदा जलाने का हुक्म दे दिया था।

जलाने के बाद सभी के शवों को इसी द्वीप पर दफना दिया गया। इसके बाद से ही आसपास के लोग इस द्वीप को शापित और भुतहा मानते हैं। माना जाता है कि यहां मारे गए लोगों की आत्माएं यहां भटकती हैं। इतना ही नहीं, कुछ ने तो अजीबोगरीब आवाजें सुनने का भी दावा किया है। प्लेग के बाद एक बार फिर महामारी ने पोवेग्लिया द्वीप पर दस्तक दी और यहां काला बुखार नामक बीमारी फैल गई। वैज्ञानिक अभी तक यहां लगातार फैल रही महामारियों के रहस्य को सुलझा नहीं पाए हैं।

इसके बाद मानसिक रोगों का एक अस्पताल भी बनाया गया था। हालांकि इस अस्पताल को 1960 के दशक में बंद कर दिया गया, इसके बाद से लोग वहां नहीं जाते। इटली की सरकार ने इस द्वीप पर पर्यटकों की एंट्री को बैन कर रखा है। वर्तमान में यहां करीब 100 परिवार रहते हैं, लेकिन किसी बाहरी का यहां आना मना है। 2014 में खबर आई थी कि इटली ने भारी कर्ज को उतारने के लिए इस द्वीप को बेचने की पेशकश की है। इटली के एक बिजनेसमैन लुइगी ब्रुगनारो ने करीब 4 करोड़ रुपए में इस द्वीप को खरीदा था।