हाल ही में हुई एक स्‍टडी में सामने आया है कि प्रेग्‍नेंसी में पैरासिटामोल लेने का संबंध बच्‍चे में अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर यानि एडीएचडी और ऑटिज्‍म के लक्षणों से है। बार्सिलोना इंस्‍टीट्यूट फॉर ग्‍लोबल हैल्‍थ द्वारा करवाए गए यूरोपियन जरनल ऑफ एपिडेमियोलॉजी में प्रकाशित स्‍टडी में यह निष्‍कर्ष सामने आया है।इस स्‍टडी में 6 यूरोपियन कोहर्ट में 70 हजार से भी ज्‍यादा बच्‍चों को शामिल किया गया था। इसमें पाया गया कि एडीएचडी और ऑटिज्‍म स्‍पेक्‍ट्रम कंडीशन का संबंध प्रेग्‍नेंसी के दौरान मां के पैरासिटामोल लेने से था।

कुल मिलाकर शोधकर्ताओं ने देखा कि जिन 73,881 बच्‍चों से डाटा लिया गया था, उनकी मां ने प्रेग्‍नेंसी में पैरासिटामोल ली थी। इन बच्‍चों में एक एडीएचडी या एएससी का लक्षण था। 14 से 56 पर्सेंट मांओं ने बताया कि उन्‍होंने प्रेग्‍नेंसी में पैरासिटामोल खाई थी। इस स्‍टडी में पाया गया कि जिन बच्‍चों की मां ने डिलीवरी से पहले पैरासिटामोल खाई, उनके बच्‍चों में एएससी के लक्षण होने की 19 प्रतिशत और एडीएचडी के लक्षण आने की संभावना 21 प्रतिशत थी। इस स्‍टडी के प्रमुख लेखक आईएसग्‍लोबल शोधकर्ता सिल्विया एलेमनी ने कहा कि 'हमने पाया कि प्रेग्‍नेंसी में पैरासिटामोल लेने का असर लड़के और लड़कियों, दोनों पर एक ही तरह से पड़ता है।

46 से 56 पर्सेंट प्रेगनेंट महिलाएं नौ महीनों के अंदर कभी न कभी पैरासिटामोल लेती ही हैं। हालांकि, पैरासिटामोल को गर्भवती महिलाओं और बच्‍चों के लिए सबसे सुरक्षित बुखाररोधी दवा माना जाता है। हालांकि, प्रेग्‍नेंसी में पैरासिटामोल खाने से बच्‍चे का दिमाग कमजोर होना, बिहेवरियल प्रॉब्‍लम और एएससी और एडीएचडी के लक्षण पैदा हो सकते हैं। बच्‍चों में एडीएचढी के इनअटेंशन, हाइपरएक्टिविटी लक्षण सामने आ सकते हैं। इसमें बच्‍चे लगातार कोई मूवमेंट करते हैं, ऐसा लगता है जैसे कि वो आपकी बात सुन नहीं रहे हैं, चुपचाप खेलने में दिक्‍कत आती है, दूसरों के काम में दखल देते हैं, आसानी से ध्‍यान भटक जाता है और अपना काम पूरा नहीं कर पाते हैं।

एडीएचडी के लिए कोई एक ट्रीटमेंट नहीं है। हर बच्‍चे को अलग तरह की ट्रीटमेंट की जरूरत होती है। हो सकता है कि किसी बच्‍चे को दवा से साइड इफेक्‍ट हो जाए। एडीएचडी में बच्‍चों को एंग्‍जायटी या डिप्रेशन है तो उसे दवा और बिहेवरियल थेरेपी एक साथ दी जा सकती है। ऑटिज्‍म का शिकार बच्‍चा अपना नाम सुनकर भी रिएक्‍ट नहीं करता है, वो आंखों से आंखें नहीं मिला पाता है, उसे देखकर आपके मुस्‍कुराने पर बच्‍चा मुस्‍कुराता नहीं है, कोई स्‍वाद, गंध या आवाज पसंद न आने पर बहुत दुखी हो जाता है, बार-बार एक ही मूवमेंट करता है जैसे कि हाथों काे चलाना, बाकी बच्‍चों की तरह बातें न करना और एक ही बात दोहराने जैसे लक्षण सामने आते हैं। ऑटिज्‍म का कोई इलाज नहीं है। डॉक्‍टर के साथ मिलकर बिहेवरियल थेरेपी से बच्‍चे का इलाज किया जाता है। ये बच्‍चे बाकी बच्‍चों की तरह नॉर्मल व्‍यवहार नहीं करते हैं।