भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने एक बड़ी घटना होने से रोक दिया। चांद के चारों तरफ चक्कर लगा रहे अमेरिका के लूनर रीकॉनसेंस ऑर्बिटर ( NASA- LRO) और चंद्रयान-2 (Chandrayaan-2) के बीच टक्कर होने वाली थी। ये दोनों ही अलग-अलग कक्षाओं में चक्कर लगा रहे थे, लेकिन एक जगह ऐसी आ रही थी, जहां पर LRO और चंद्रयान-2 की टक्कर हो जाती। इस गंभीर स्थिति में इसरो के वैज्ञानिकों ने चंद्रयान-2 ऑर्बिटर के इंजनों को ऑन करके दूसरी कक्षा में भेज दिया।

खबर है कि जुलाई 2019 के बाद से चंद्रयान-2 जिसे इसरो CH2O भी बुलाता है, उसने कई मुसीबतें झेली हैं। सबसे बड़ी मुसीबत थी विक्रम लैंडर और प्रज्ञान रोवर की हार्ड लैंडिंग और संपर्क टूटना। लेकिन इसका ऑर्बिटर आज भी चांद के चारों तरफ चक्कर लगा रहा है और जरूरी सूचनाएं भेज रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डेटा का आदान-प्रदान किया जा रहा है।

20 अक्टूबर को इसरो और नासा दोनों को यह लगा कि चंद्रयान-2 ऑर्बिटर (CH2O) और नासा एलआरओ (NASA LRO) के बीच टक्कर हो सकती है। ऐसा पहली बार हुआ है कि जब किसी अन्य ग्रह पर दो देशों के स्पेसक्राफ्ट आमने-सामने आने वाले थे। वैज्ञानिकों की गणना के मुताबिक इनके बीच की दूरी कम से कम 100 मीटर रहती। इतनी दूरी पर दो स्पेसक्राफ्ट अगर अलग-अलग दिशाओं में निकलते हैं, तो दोनों को प्रभाव पड़ता है। यह भी संभव था कि इनकी टक्कर हो जाती।

इसके बाद इसरो और नासा ने 18 अक्टूबर को अपने-अपने स्पेसक्राफ्ट की कक्षा को धीरे-धीरे बढ़ाना और घटाना शुरु किया। इसरो ने जब कक्षा बदल ली तो उसके बाद मिले डेटा के अनुसार अब नासा के LRO और चंद्रयान-2 (CH2O) में निकट भविष्य में किसी तरह के टक्कर की आशंका नहीं है। भविष्य में अगर ऐसी कोई आशंका बनती दिखी तो फिर से कक्षाओं में परिवर्तन किया जाएगा।